कॉमेडी
सुखान्त नाटकों को कॉमेडी कहा जाता है। कॉमेडी शब्द यूनानी कॉमस से आया जिसका अर्थ हर्षोल्लास है। कॉमस प्राचीन यूनान में उन गायकों को कहा जाता था जो डायोनिसस नाम के देवता के सम्मान में आयोजित होने वाले धार्मिक आनन्दोत्सव के समय गाया करते थे। इस प्रकार कॉमेडी का उद्भव धार्मिक माना जाता है। कॉमेडी में हास परिहास, हास्यास्पद परिस्थितियां, मजाकिया संवाद परन्तु परिष्कृत रूप में, संवाद तथा कथानक की गंभीरता आदि होती है। अनेक मोड़ों से होकर गुजरते हुए ऐसे नाटक का अंत अंततः सुखान्त होता है।अरस्तु के अनुसार कॉमेडी में किसी ऐसे दोष या असौंदर्य का चित्रण होता है जो दुःखद या विनाशकारी नहीं होता।
इलियट डॉनेट्स के अनुसार कॉमेडी वह कथा है जिसमें व्यक्ति समष्टिगत और व्यक्तिगत जीवन व्यवहारों में व्यक्त प्रथाओं और स्वभावों का मनोरंजक चित्रण होता है और इस चित्रण से एक ओर तो पाठक यह सीखता है कि जीवन में उसे क्या करना चाहिए और दूसरी ओर यह कि क्या त्यागना चाहिए। कॉमेडी के चरित्रों की सृष्टि जीवन के निरीक्षण एवं अनुभव के फलस्वरूप होती है। उसका हास्य व्यक्तिगत स्तर पर न होकर सम्पूर्ण सामाजिक स्तर पर होता है और परिहास के उन्मुक्त क्षणों में हमें सोचने को विवश कर देता है - हमें हमारी त्रुटियों का विश्वास दिलाता है। कॉमेडी के पात्र विभिन्न यथार्थ स्थितियों का अतिरंजनापूर्ण चित्रण करते हैं।
सिसरो ने कॉमेडी को जीवन की प्रतिलिपि, प्रथाओं का दर्पण और तथ्य की छाया माना।
कॉमेडी को सामान्यतः पांच श्रेणियों में बांटा जाता है - शास्त्रीय कॉमेडी, रूमानी कॉमेडी, भावप्रधान कॉमेडी, सामाजिक कॉमेडी, तथा समस्यामूलक कॉमेडी।