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खण्डिता

खंडिता एक प्रकार की नायिका होती है। प्रेमी या पति के किसी और के साथ प्रेम-संबंध होने पर ऐसी नायिकाओं का दिल टूट जाता है या खंडित हो जाता है, जिसके कारण इन्हें खंडिता कहा जाता है।

भानुदत्त ने कहा कि जिसका प्रिय रात्रि में अन्यत्र रमकर प्रातःकाल परस्त्री संसर्ग के जिह्नों से युक्त आया हो। मतिराम और पद्माकर ने बस इतना जोड़ा कि यह देखकर खण्डिता दुखी होती है।

सामान्य नायिका ईर्ष्या करती है और दुखी होती है।

परन्तु मुग्धा नायिका अपना आक्रोश व्यंग्य से व्यक्त करती है।

प्रौढ़ा खंडिता के निःसंकोच आदर भाव में स्वतः व्यंग्य छिपा होता है।

परकीया खंडिता को दुःख तथा आन्तरिक खेद होता है, जो विरह पीड़ा का खेद होता है।

रीतिकाव्य में खण्डिता नायिकाओं की विभिन्न अवस्थाओं में ईर्ष्या, द्वेष, क्लेश, व्यथा, आकांक्षा आदि और उनके द्वारा की जाने वाली प्रतिक्रियाएं और व्यंग्य देखने को मिलते हैं।

Page last modified on Wednesday September 3, 2014 06:45:29 GMT-0000