गद्य-काल
साहित्य में उस काल को गद्य-काल कहा जाता है जिसमें गद्य रचनाएं ही अधिक मात्रा में होती है तथा उनका ही दबदबा रहता है।हिन्दी साहित्य में ही नहीं अपितु संसार की सभी भाषाओं के आधुनिक काल को गद्य-काल भी कहा जाता है, क्योंकि साहित्य में गद्य की ही प्रधानता बनी हुई है। यह अलग बात है कि अलग-अलग भाषाओं के साहित्य का आधुनिक का अलग-अलग समय में प्रारम्भ हुआ। हिन्दी साहित्य में उन्नीसवीं शताब्दी और उसके बाद के समय को गद्य काल कहा जाता है। उसके पूर्व पद्य की प्रधानता थी और उस काल को पद्य काल कहा जाता है।