गर्बा
गर्बा एक प्रकार का गुजराती लोकगीत, नृत्य और एक विशेष पात्र का नाम है। नवरात्रों के समय देवी अम्बा की पूजा के समय एक विशेष प्रकार का पात्र स्थापित किया जाता है जिसे गर्बा पात्र कहते हैं। वह पात्र मिट्टी का बना होता है जिसे मंगल कलश के रूप में सजाकर देवी की पूजा के लिए स्थापित किया जाता है तथा उसपर चार ज्योतियां प्रज्ज्वलित की जाती हैं। गुजरात की स्त्रियां इसी गर्बा के चारों और परिक्रमा करते हुए गीत गाती हैं और साथ-साथ नृत्य भी करती हैं। इसी नृत्य को गर्बा नृत्य, गीत को गर्बा गीत, तथा पात्र को गर्बा पात्र कहा जाता है।माना जाता है कि गर्बा की परम्परा द्वारका के मंदिर से प्रारम्भ हुई। स्त्रियां पुत्रवती होने की कामना पूर्ण होने के लिए गर्बा स्थापित कर उनकी परिक्रमा करते हुए यह पारम्परिक गीत गाती हैं और नृत्य करती हैं।
जिन स्त्रियों की संतान नहीं हैं वे संतान की प्राप्ति के लिए, विशेषकार पुत्रवती होने के लिए, द्वारका जाती हैं और अपने वस्त्रों पर हाथ के छापे लगवाती हैं।