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गायन

संगीत की विधा को गायन कहा जाता है, जिसमें गेय पदों को गाने की क्रिया सम्पन्न की जाती है। परन्तु भारत में गायन नाम की एक विशेष जाति भी है जिसका मूल पारम्परिक काम या पेशा गान-बजाना है। इन्हें गंधर्वों की एक उपजाति माना गया है। मनुस्मृति जैसे प्राचीन ग्रंथों में गायन जाति का उल्लेख है। गायन जाति के पुरुष को गायन तथा स्त्री को गायिनी भी कहा गया है।

वैसे गायिनी भी एक मात्रिक छन्द है जिसे पादों में क्रमानुसार 12 से 18 तथा 12 से 20 मात्राएं होती हैं। इसके प्रत्येक चरण के अन्त में एक गुरु होता है तथा बीस मात्राओं के बाद एक जगण।


Page last modified on Sunday February 22, 2015 07:12:56 GMT-0000