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गोंडी

गोंडी गोंड जनजाति की बोली है। यह शब्द तेलुगू भाषा के कोंड शब्द से निकला जिसका अर्थ होता है पर्वत। अर्थात पर्वत पर रहने वाले लोगों को गोंड कहा गया और इस तरह गोंडी उनकी बोली हुई।
यह द्रविड़ भाषा परिवार की मध्यवर्ती शाखा की बोली है।
छिंदवाड़ा, सिवनी, बेतूल, होशंगाबाद, पूर्वी निमाड़, तथा बालाघाट के गोंड शुद्ध गोंडी बोलते हैं, जबकि शहडोल तथा रीवां में इसपर बघेली का तथा मंडला में छत्तीसगढ़ी का प्रभाव है।
गोंड जनजाति की विभिन्न शाखाओं की बोलियों में अन्तर होता है जिसके कारण उनकी बोलियों को माड़िया गोंडी, या राज गोंडी आदि नाम से भी जाना जाता है।
गोंडवानी इस बोली की प्रमुख लोकगाथा गीत है।

Page last modified on Wednesday August 14, 2013 10:50:50 GMT-0000