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गोविन्ददास

गोविन्ददास (1505-1585) एक संत कवि थे। उनका जन्म एक सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

वह गृहस्थ थे परन्तु एक समय आया जब पारिवारिक बंधन छोड़कर संन्यासी हो गये।

गोविन्ददास ने गृहस्थी से विरक्त होने के बाद भक्ति का मार्ग अपना लिया था। पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय में शामिल होने से पूर्व वह ब्रज में ही रहते थे। वहां वह गोविन्दस्वामी के नाम से विख्यात हुए तथा उनके अनेक शिष्य भी बन गये। गायन तथा पद रचना में उन्हें उत्तम कोटि का माना जाता था।

विट्ठलनाथ भी उनके पदों और गायन को सुना करते थे तथा उन्होंने ही गोविन्ददास को पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। परन्तु गोविन्दस्वामी आसानी से इसके लिए तैयार नहीं थे। एक दिन यमुना तट पर विट्ठलनाथ संध्या वन्दना कर रहे थे कि गोविन्ददास वहां पहुंचे। उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ कि एक भक्तिमार्गी कर्मकांड कैसे कर रहे हैं! गोविन्ददास ने जब यह प्रश्न उनसे पूछा तो उन्होंने कर्म तथा भक्ति के सम्बंधों के रहस्य को बतलाया। गोविन्ददास की आशंका मिट गयी थी और उन्होंने विट्ठलनाथ से दीक्षा ग्रहण कर ली। मर्यादावादी गोविन्ददास अब विशुद्ध वैष्णव बन गये थे।



Page last modified on Saturday February 1, 2014 10:34:13 GMT-0000