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चौपई


चौपई एक प्रकार की काव्यात्मक रचना है। यह मात्रिक सम छन्द का एक भेद है। इसे जयकरी के नाम से भी जाना जाता है। चौपई चौपाई से अलग प्रकार की रचना है।

हिन्दी साहित्य में अनेक कवियों ने चौपइयों का प्रयोग किया है जिनमें प्रमुख हैं सूरदास, नन्ददास, केशव, सूदन, चन्द्र आदि।

इस छन्द का प्रत्येक चरम पन्द्रह मात्राओं का होता है तथा उसके अन्त में ग ल का विधान है। उदाहरण स्वरूप नन्ददास की एक चौपई यहां प्रस्तुत है - तबकी कही न परत कछु बात। इक-इक पलक कलप सम जात।

Page last modified on Friday November 4, 2016 08:15:43 GMT-0000