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छह पुत्र

सम्पूर्ण जगत को उत्पन्न करने वाले सत्य पुरूष ने सृष्टि के लिए जिन छह पुत्रों को उत्पन्न किया था उन्हें छह पुत्र के रूप में जाना जाता है। इस बात को सबसे पहले कबीर मंसूर ने कहा था। उनके अनुसार ये छह पुत्र हैं - सहज, अंकुर, इच्छा, सुहंग, अचिन्त तथा अक्षर।

कबीरपंथी साहित्य में जिन नौ लोकों की चर्चा है उनमें से छह के नाम इन्हीं छह पुत्रों के नाम पर हैं। एक के ऊपर एक की अवस्थिति इन लोकों की है। नीचे से इनका क्रम है - दह्य, विष्णु, निरंजन, अरण्य, अचिन्त, सुहंग, इच्छा, अंकुर, एवं सहज। पहले तीन द्वीपों - दह्य, विष्णु तथा निरंजन द्वीपों में क्रमशः सालोक्य, सामीप्य, तथा सारूप्य मुक्ति मिलती है। अरण्य द्वीप अक्षर नामक पुत्र का द्वीप है जबकि अन्य के नामों में कोई परिवर्तन नहीं है।

इन नौ द्वीपों या लोकों से भी ऊपर सत्य पुरूष का सत्य लोक है।

सत्यपुरूष के छहो पुत्र बड़े तपस्वी तथा अत्यन्त तेजस्वी थे।


Page last modified on Tuesday February 21, 2017 06:06:47 GMT-0000