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छेकोक्ति

छेकोक्ति हिन्दी साहित्य में एक गौण अलंकार है। अप्पय दीक्षित ने इसकी परिभाषा दी कि जब लोकोक्ति से किसी अन्य अर्थ की व्यंजना हो तब छेकोक्ति अलंकार होता है।

उदाहरण देखें - एक व्यक्ति ने जब किसी दूसरे व्यक्ति से किसी तीसरे का हाल पूछा तब दूसरे व्यक्ति ने चौथे व्यक्ति की ओर संकेत करते हुए कहा - भुजंग एव जानीते भुजंगचरणं सखे (अर्थात्, मित्र सांप की गति को तो सांप ही जानता है)। इस लोकोक्ति से दूसरे व्यक्ति ने तीसरे और चौथे को खतरनाक बताया और उन्हें सांप की संज्ञा दी।

Page last modified on Friday February 24, 2017 06:11:47 GMT-0000