Loading...
 
Skip to main content
(Cached)

परमानंददास

परमानंददास (1491-1583) एक प्रसिद्ध भक्त कवि थे। वह कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार से थे तथा कवि-कीर्तनकार के रूप में विख्यात थे। उस समय उन्हें लोग परमानन्द स्वामी के नाम से जानते थे।

वह 1519 में वल्लभाचार्य के सम्पर्क में आये और उनसे दीक्षा ग्रहण कर उनके द्वारा स्थापित पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय में शामिल हो गये।

परमानन्ददास अपनी बाल्यावस्था से ही संसार से विरक्त होकर भगवद् भजन में लग गये थे। उन्हें लोग स्वामी कहते थे तथा उनके अनेक शिष्य भी थे।

उनका गायन अद्भुत था। एक बार वह मकरस्नान के लिए प्रयाग गये। वहा उनकी पद रचना और गायन के कारण उनकी धूम मच गयी। उनकी ख्याति से प्रभावित होकर ही वल्लभाचार्य ने उन्हें स्वपन में अडैल जाने को प्ररित किया जो वल्लभाचार्य का मूल निवास स्थान था। फिर वल्लभाचार्य ने उन्हें श्रीकृष्ण की बाल लीला का महात्म्य समझाया।

परमानन्ददास की काव्य रचना पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय में परिणाम तथा उत्कृष्ठता में केवल सूरदास से ही कम थी। उन्होंने भी कृष्ण के प्रति वात्सल्य भाव का सुन्दर चित्रण किया।

परमानन्दसागर उनकी प्रमुख रचना है।


Page last modified on Saturday February 1, 2014 10:32:19 GMT-0000