Skip to main content

पलायन

पलायन का सामान्य अर्थ है वर्तमान स्थान को छोड़कर किसी बेहतर की उम्मीद से अन्यत्र चले जाना। उदाहरण के लिए, जब एक बेरोजगार अपना गृह स्थल छोड़कर रोजगार की तलाश में कहीं और चला जाता है तो हम कहते हैं कि उसका पलायन हुआ। लेकिन मनोविज्ञान में पलायन एक प्रवृत्ति है जिसमें व्यक्ति 'जो है' उससे दूर 'जो नहीं है' उसकी ओर जाता है। आधुनिक उत्क्रान्तिवाद (इमर्जेंट इवोल्यूशन) में व्यक्ति द्वारा उत्तरोत्तर किसी नवीन का आविर्भाव को इस पलायन की प्रवृत्ति का ही परिणाम माना जाता है। वर्तमान के प्रति असंतोष को इसका कारण माना जाता है, और किसी बेहतर की कल्पना को इसका प्रेरणास्रोत।

जहां तक जगत और जीवन का प्रश्न है, व्यक्ति में इनके प्रति व्यापक असंतोष के कारण इनसे पलायन करने की इच्छा स्वाभाविक रूस से होती है। इसलिए वह इनकी सीमाओं से पार जाकर किसी असीम को पा लेने की इच्छा रखता है, अर्थात अनंत ब्रह्म या ईश्वर को पा लेने की। पलायन का यह दार्शनिक स्वरुप है, और धार्मिक स्वरुप भी। वैदिक साहित्य, या फिर किसी भी धार्मिक साहित्य में उपलब्ध अनेक प्रार्थनाओं में इसकी झलक मिलती है। संसार से वैराग्य हो जाने के पीछे भी इसी पलायन की भावना काम करती है। भक्ति की भावना के मूल में भी यही पलायन है।

पलायन के दो प्रमुख कारणों में हैं वर्तमान या अतीत के प्रति निराशा या किसी नवीन के प्रति उत्साह। साहित्य और कला में पलायन के उदाहरणों में निराशा या उत्साह दोनों को भांति-भांति से अभिव्यक्त किया गया है।

Page last modified on Friday August 14, 2026 15:23:18 UTC : Initial version