पर्यायोक्ति
पर्यायोक्ति एक अलंकार है जिसका प्रयोग साहित्यिक लेखन में किया जाता है। यह प्रचीन काल से चला आ रहा अर्थालंकार है। पर्याय समान अर्थों वाले शब्दों को कहते हैं। साहित्य में जब एक ही बात को किसी अन्य पर्याय के साथ वैचित्र्य के साथ कहा जाता है तो पर्यायोक्ति अलंकार होता है। यदि साधारण शब्दों में कहें तो, इस अलंकार में किसी बात को सीधे न कहकर प्रकारान्तर से किसी और तरीके से इंगित किया जाता है। मम्मट ने स्पष्ट किया है कि व्यंजना द्वारा वाच्यार्थ का कथन पर्यायोक्ति में आवश्यक है। परन्तु ध्यान रहे कि व्यंजना द्वारा वाच्यार्थ का कथन ध्वनि के माध्यम से नहीं अपितु उक्ति वैचित्र्य के माध्यम से होता है। इसमें कहने का ढंग अलग सा होता है, लेकिन जो कथ्य है उसे सीधे साफ-साफ शब्दों में नहीं कहा जाता।निकटवर्ती पृष्ठ
पर्यालोचना, पलना, पलायन, पलायनवाद, पवाड़ा