पश्चिमी हिन्दी
पश्चिमी हिन्दी भारत की खड़ी बोली, बांगरू, व्रजभाषा, कन्नौजी तथा बुन्देली बोलियों के समूह को कहा जाता है। यह हिन्दी भाषा के दो वर्गीकरणों में से एक है। दूसरा वर्गीकरण है पूर्वी हिन्दी। खड़ी बोली को सरहिन्दी भी कहा जाता है और यही आधुनिक मानक हिन्दी का आधार है। यह पश्चिम रुहेलखण्ड, गंगा के उत्तरी दोआब तथा अम्बाला के आसपास की बोली है। बांगरू को जाटू या हरियानी या हरियाणवी के नाम से भी जाना जाता है। यह दिल्ली, करनाल, रोहतक, हिसार, पटियाला, नाभा तथा जींद में बोली जाती है। व्रजभाषा मथुरा, आगरा, अलीगढ़, तथा धौलपूर में बोली जाती है। कन्नौजी कन्नोज में बोली जाती है, जिसमें व्रजभाषा और अवधी का मिश्रण है। बुन्देली बुंदेलखंड में बोली जाती है।