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पारमिता

पारमिता बौद्ध दर्शन में सद्गुणों की वह पराकाष्ठा है जिसकी साधना से व्यक्ति बुद्धत्व प्राप्त करता है। बौद्ध धर्म के महायान में छह प्रकार की पारमिताओं का वर्णन है। ये हैं - दान, शील, क्षांति, वीर्य, ध्यान, तथा प्रज्ञा। दान पारमिता में निःस्वार्थ और उदारता का भाव रहता है; शील पारमिता में नैतिकता और अनुशासन का; क्षान्ति पारमिता में क्षमा और सहनशीलता का; वीर्य पारमिता में उत्साह, दृढ़ प्रयास, और आध्यात्मिक शक्ति का; ध्यान पारमिता में शान्ति और मानसिक एकाग्रता का; और प्रज्ञा परमिता में परमार्थ ज्ञान, विवेक और सर्वोच्च ज्ञान का। कहा जाता है कि इन सभी पारमिताओं की साधना बोधिचित्त उत्पन्न करने के लिए आवश्यक है। सबसे अन्तिम प्रज्ञा पारमिता सबसे महत्वपूर्ण है ौर उसके बाद ही बोधिचित्त की उत्पत्ति होती है, अर्थात् वैसा चित्त जिसमें करुणा, ज्ञान, और शून्यता एक साथ अवतरित हो जाती है। इसे परम अवस्था माना जाता है जिसके बाद व्यक्ति अहंकार और स्वार्थ से पूरी तरह मुक्त होकर जीवन के दुःखों से पार हो जाता है।

निकटवर्ती पृष्ठ
पाराती, पारिजातक, पाल वंश, पालि भाषा और साहित्य, पावापुरी

Page last modified on Tuesday September 8, 2026 13:09:21 UTC