पारिजातक
पारिजतक उपरूपक का ही एक भेद है। इसे पारिजातकला के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे रूपकों में एक ही अंक होते हैं और इनमें मुख्यतः श्रृंगार रस की प्रधानता होती है। जहां तक नायक का प्रश्न है वह या तो देवता होते हैं या क्षत्रिय कुल में उत्पन्न उदात्त चरित्र। इसमें नायिका कई प्रकार की हो सकती है, जैसे स्वकीया, भोगिनी, कलाहान्तरिता, या गणिका। इसमें प्रायः विदूषक भी होते हैं परन्तु उनका होना अनिवार्य नहीं होता।