पिंगल
पिंगल एक प्रचीन भारतीय आचार्य का नाम है। पिंगलाचार्य ने छन्द सूत्र नाम में छन्द शास्त्र के आदि ग्रंथ की रचना की थी, इसी कारण छन्द शास्त्र को भी पिंगल के नाम से जाना जाता है। पिंगलाचार्य का काल ई.पू. 200 के आसपास निर्धारित किया गया है। बाद के छन्द-शास्त्रों, जैसे प्राकृत भाषा संबंधी ग्रंथ प्राकृतपैंगलम्, के मंगलाचरणों में पिंगलाचार्य की बंदना की गयी है। छन्द शास्त्र में पिंगलाचार्य के महत्व का अंदाजा इसके भी लगाया जा सकता है कि जगन्नाथ प्रसाद 'भानु' की रचना छन्द प्रभाकर में मंगलाचरण के तौर पर लिखा गया -जय पिंगल गुरुराय, कर्ता छन्द प्रबंध के।
तुव चरणनि चित लाय, छन्द प्रभाकर कहतु हौ।
इतना ही नहीं, छन्द प्रभाकर मे अन्त में पिंगलाचार्य की आरती है -
जै जै जै पिंगल गुरुराया। सन्तत मोपर कीजिय दाया।