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शरीर

भारतीय चिंतन परम्परा में किसी भी जीवधारी का अस्तित्व उसके शरीर में है। इस शरीर का अस्तित्व स्थूल, सूक्ष्म, भौतिक, अभौतिक या स्वाभाविक, तथा तुरीय माना गया है।

जो भाग दिखायी देता है उसे स्थूल शरीर कहते हैं।
सूक्ष्म शरीर वह है जो दिखायी नहीं देता जैसे पंच प्राण, पंच ज्ञान (स्वाद, श्रौत्र, घ्राण, स्पर्श, तथा दृष्टि), पंच सूक्ष्म भूत, मन, तथा बुद्धि आदि सत्रह तत्वों का समुदाय। जन्म मरण आदि के समय भी यह सूक्ष्म शरीर साथ रहता है।
भौतिक शरीर वह है जो सूक्ष्म भूतों से बना है।
अभौतिक या स्वाभाविक शरीर जीव का स्वाभाविक गुण रूप शरीर है। इसे आत्मा भी कहते हैं। यही अभौतिक शरीर मुक्ति में सुख भोगता है।
तुरीय शरीर समाधि में परमात्मा के आनन्दमग्न स्वरूप वाला जीवात्मा है।

निकटवर्ती पृष्ठ
शहद, शारीरिक स्वास्थ्य, शास्त्रीय आलोचना, शीश महल, शुद्धाद्वैत

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