शुक्रवार, 4 अगस्त, 2006
भारत-अमेरिकी नाभिकीय समझौते के गोलपोस्ट
विपक्ष और विरोधी पहले वाले गोलपोस्ट से भटके
ज्ञान पाठक
भारत-अमेरिकी नाभिकीय समझौते के गोलपोस्ट के अमेरिका द्वारा बदल दिये जाने के सवाल को लेकर कल विपक्ष ने राज्य सभा में इतना शोर मचाया कि सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विरोध करने वालों में सत्तारूढ़ राजनीतिक गठबंधन में कांग्रेस के दो सहयोगी घटक वाम और समाजवादी पार्टी भी शामिल थीं। पूरे प्रकरण में जो बात साफ है वह यह कि विपक्ष और विरोधी पहले वाले गोलपोस्ट के मूल मुद्दे से ही भटक गये हैं।
पहले वाला गोलपोस्ट बना था 18 जुलाई 2005 को जब भारत के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश के साथ एक नाभिकीय समझौता किया था। उस समझौते की मुख्य बात यह थी कि अमेरिका भारत को असैन्य नाभिकीय कार्यक्रम के लिए इंधन और संबंधित साजोसामान देगा तथा उसके एवज में भारत उसे अपने ऐसे नाभिकीय प्रतिष्ठानों के निरीक्षण की इजाजत देगा।
संपूर्ण देश में इस समझौते का व्यापक विरोध इस आधार पर हुआ था कि इसके लागू होने पर देश की स्वतंत्रता और सम्प्रभुता खतरे में पड़ जायेगी। विरोध करने वाली राजनीतिक पार्टियों में भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य दलों के अलावा सरकार को बाहर से सहयोग करने वाली वाम राजनीतिक पार्टियां भी शामिल थीं। सवाल था कि यदि कोई देश स्वतंत्र तथा किसी अन्य के अधीन नहीं है तो वह अपने निरीक्षण का अधिकार क्यों देगा? यदि भारत ने यह अधिकार अमेरिका को दे दिया तो वह जब चाहेगा हमारे प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करेगा और उस स्थिति में हम स्वतंत्र कहां रह गये?
ध्यान रहे कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और इसीलिए 1974 में भारत के पहले परमाणु विस्फोट के बाद से अमरीका ने असैनिक मकसदों के लिए भी भारत को परमाणु तकनीक और ईंधन नहीं दिया है। बिना अंतर्राष्ट्रीय मदद के और किसी देश के आगे बिना झुके ही भारत ने अपनी नाभिकीय क्षमता विकसित कर ली और 1998 में फिर परमाणु परीक्षण किये। अब हमारे देश के वर्तमान नेता अमेरिका के आगे झुकने और उससे अपने प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करवाने के लिए तैयार हैं। उनका तर्क है कि ऐसा करने से लाभ होगा लेकिन स्वतंत्रता के पक्षधर किसी भी लाभ के लिए गुलामी के नजदीक जाने को तैयार नहीं हैं और इस समझौते का विरोध कर रहे हैं।
इस बीच अमेरिकी संसद के निचले सदन अर्थात् प्रतिनिधि सभा ने गत सप्ताह इस संबंध में एक विधेयक को भारी बहुमत से पारित कर दिया। विधेयक को संशोधित कर और मजबूत किया गया है ताकि समय आने पर भारत की बाहें मरोड़ी जा सके। इसपर भारत में सभी ओर से चिंता व्यक्त की गयी। इस तरह अमेरिका निर्मित यह दूसरा गोलपोस्ट है।
इस तरह भारत-अमेरिकी नाभिकीय समझौते के मामले में दूसरे गोलपोस्ट का मुद्दा सामने आया और बदल गया पहले का मुद्दा। अब मुद्दा है पहला गोलपोस्ट नहीं बदलने देने का और छूट गया पहला गोलपोस्ट नहीं बनने देने का मुद्दा। डा. मनमोहन सिंह और अमेरिकी इस परिवर्तन पर मन ही मन खुश होंगे।
यहां उदाहरण प्रस्तुत है। कल राज्य सभा में यह मामला प्रश्न काल में भाजपा की माया सिंह ने उठाया। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि 18 जुलाई 2005 के भारत-अमेरिकी संयुक्त घोषणापत्र में जो भारत का रूख था उसमें नरमी लाये जाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट आश्वासन की मांग की कि एक विश्सनीय नाभिकीय प्रतिरोधक क्षमता रखने की भारत की स्वतंत्रता के साथ अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर रजामंदी के नाम पर समझौता नहीं किया जायेगा।
प्रधान मंत्री सदन में उपस्थित थे परंतु जवाब विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने दिया। उन्होंने कहा कि 18 जुलाई 2005 के ढांचे, भारत की सैन्य और असैन्य नाभिकीय प्रतिष्ठानों को अलग-अलग करने की योजना, तथा परमाणु परीक्षण न करने की एकतरफा स्वैच्छिक प्रतिबद्धता से आगे कुछ नहीं किया जायेगा।
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने पूछा कि प्रधान मंत्री ने जो गोलपोस्ट नहीं बदलने का आश्वासन दिया है उसपर क्या कोई संसदीय प्रस्ताव लाया जायेगा? इसका जवाब देते समय यदि आनंद शर्मा ने भाजपा नेतृत्व वाले राजग पर आरोप नहीं लगाया होता तो शायद विवाद उतना नहीं बढ़ता।
वाम नेता सीताराम येचुरी ने भी सदन की चिंता की अभिव्यक्ति के लिए एक प्रस्ताव लाने की मांग की। सरकार इस समय ऐसे किसी प्रस्ताव पारित करने के पक्ष में नहीं है। वाम नेताओं को भी भाजपा के साथ खड़े होने में परेशानी है। प्रधान मंत्री भी वाम नेताओं को मनाने में लगे हुए हैं।
ऐसी स्थितियों में सिर्फ एक बात की उम्मीद की जा सकती है कि प्रधान मंत्री जो समझौता 18 जुलाई 2005 को कर आये हैं वह लागू हो जायेगा। फिर सदन को कल आनंद शर्मा ने जो कुछ बताया उन्हें ही लागू कर दिया गया तो भारत के पास क्या बच जायेगा?
भारत की उपलब्धियों, आत्म-सम्मान और सम्प्रभुता वाला 18 जुलाई 2005 के पहले वाला गोलपोस्ट क्या हमारा देश त्याग देगा? #
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से
भारत-अमेरिकी नाभिकीय ...
System Administrator - 2007-10-20 06:01
भारत-अमेरिकी नाभिकीय समझौते के गोलपोस्ट के अमेरिका द्वारा बदल दिये जाने के सवाल को लेकर कल विपक्ष ने राज्य सभा में इतना शोर मचाया कि सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विरोध करने वालों में सत्तारूढ़ राजनीतिक गठबंधन में कांग्रेस के दो सहयोगी घटक वाम और समाजवादी पार्टी भी शामिल थीं।