दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत के संबंध चार दशकों से भी अधिक समय के अंतराल के बाद मई 1993 में जोहान्सबर्ग में एक सांस्कृतिक केन्द्र के उद्घाटन के साथ बहाल हुए । दक्षिण अफ्रीका के साथ राजनयिक और वाणिज्यिक संबंध औपचारिक रूप से नवम्बर 1993 में बहाल हुए । मई 1994 में प्रीटोरिया में भारतीय उच्चायोग का उद्घाटन हुआ, जिसके बाद उसी माह डरबन में महावाणिज्य दूतावास खोला गया । दक्षिण अफ्रीका का नई दिल्ली में उच्चायोग के अलावा मुंबई में महावाणिज्य दूतावास भी है ।

दक्षिण-अफ्रीका-अफ्रीकी महाद्वीप का प्रवेश द्वार

दक्षिण अफ्रीका, 2 खरब 77 अरब डॉलर के जीडीपी के साथ अफ्रीका की आर्थिक महाशक्ति है जोकि समस्त अफ्रीका के जीडीपी का 30 प्रतिशत है । औद्योगिक उत्पादन, और खनिज उत्पादन में यह पूरे महाद्वीप में अग्रणी स्थान रखता है । पूरे महाद्वीप में खपत होने वाली बिजली का 50 प्रतिशत का उत्पादन दक्षिण अफ्रीका में होता है ।

दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था पिछले पांच वर्षों से प्रतिवर्ष 4 प्रतिशत से भी अधिक दर से प्रगति कर रही थी परन्तु व्यापार और उपभोक्ता मांग में आई कमी के कारण 2009 में इसमें तेजी से गिरावट आई । वास्तविक जीडीपी में 2010 में सुधार के संकेत हैं । जूनजुलाई में होने वाले फुटबाल विश्व कप की मेजबानी के कारण अर्थव्यवस्था में सुधार आने की संभावना हे । खेल के इस महाकुंभ से पर्यटन और सेवा क्षेत्रों को काफी बढा़वा मिलेगा ।

दक्षिण अफ्रीका के अग्रणी व्यापारिक भागीदार ओईसीडी के सदस्य देश और चीन हैं । अमेरिका, जापान और चीन दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख व्यापार सहयोगी हैंदक्षिण अफ्रीका के कुल निर्यात का 30 प्रतिशत इन्हीं तीन देशों को होता है ।

भारत- दक्षिण अफ्रीका द्विपक्षीय व्यापार

दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत के संबंधों की बहाली के बाद से ही द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढा़ है । वर्ष 2008-09 के दौरान द्विपक्षीय व्यापार 3 अरब डालर से बढक़र 7 अरब डालर तक पहुंच गया है । दोनों देशों ने 2012 तक आपसी व्यापार को बढा़कर 10 अरब डालर तक ले जाने का निश्चय व्यक्त किया है ।

भारत से दक्षिण अफ्रीका को मुख्य रूप से खनिज र्इंधन, वाहन एवं परिवहन उपकरणहिस्से पुर्जे, अरंडी का तेल, प्रसाधन, सूती धागा, कपड़े, मेडअप्स पर्दे आदि प्राकृतिक रेशम, औषधि, शुद्ध रसायन , अजैविक, जैविककृषि रसायन, जैविक रंग, तारकोल रसायन, इलेक्ट्रानिक सामग्री,तैयार चमड़ा चमड़े का सामान , हीरे और जवाहरात का निर्यात होता है ।

वहां से जो वस्तुएं भारत में आयात होती हैं वे हैं - कोयला कोक और कोयले के चूरे की टिकिया, हीरा , नग-नगीने ,चांदी, सोना, इलेक्ट्रानिक सामग्री, उर्वरक, कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन , कत्रिम गोंद, लौह इस्पात, धातु अयस्क, गैर लौह धातु, धातु भंगार और अशुद्ध कच्चा खनिज । दोनों देशों के बीच व्यापार की उनन्त संभावनायें हैं । कुछ ऐसी वस्तुओं का व्यापार हो सकता है जिनके बारे में अभी तक प्रयास ही नहीं किया गया है । भारत से दक्षिण अफ्रीका को वाहन और वाहनों के कलपुर्जे, परिवहन उपकरण, औषधियां और औषधीय रसायन, कम्प्यूटर सापऊटेवयर , अभियांत्रिकीय सामग्री, जूते, चावल और हीरे जवाहरात आदि के निर्यात की अच्छीं संभावनायें हैं । जहां तक आयात का प्रश्न है, वहां से रॉक फास्फेट , नग नगीने, खनिज , उर्वरक , इस्पात, कोयला, परिवहन उपकरण, लुगदी और लुगदी बनाने के उपकरण के आयात की अच्छी संभावनाएं हैं ।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

यद्यपि दक्षिण अफ्रीका में भारत के निवेश के बारे में सही-सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, तथापि अनुमान है कि भारतीय कंपनियां दक्षिण अफ्रीका में 2 अरब अमेरिकी डालर की परियोजनाओं पर काम कर रही हैं । प्रमुख निवेशकों में टाटा (वाहन, आईटी फेरोक्रोम संयंत्र), अपोलो (टायर्स) शामिल हैं । इनके अलावा रनबक्शी और सिपला जैसी दवा निर्माता कंपनियां भी हैं ।

जिस प्रकार दक्षिण अफ्रीका में भारत का निवेश बढ ऱहा है, उसी प्रकार भारत में भी दक्षिण अफ्रीका के निवेश में वृद्धि हो रही है । भारत में जो दक्षिण अफ्रीकी कंपनियां पांव फैला रही हैं, उनमें एसएवी मिलर (मदिरा निर्माण), एसीएसए (मुंबई विमान तल का उन्नयन), एसएएनएलएएम और ओल्ड म्युचुअल (बीमा), आल्टेक (सेटटॉप बाक्स), ऐडकॉक इनग्राम (औषधि निर्माण) रैंड मर्चेंट बैंक और स्टैन्डर्ड बैंक प्रमुख हैं ।

द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के विस्तार से दोनों देशों को ही लाभ होगा । भारत दक्षिण अफ्रीका का एक उपयोगी निवेश और व्यापार का उपयोगी भागीदार हो सकता है, क्यों कि भारत सापऊटवेयर , वित्तीय सेवाओं और सापऊटेवयर इंजीनियरिंग में अत्यधिक कुशल और दक्ष कार्मिकों का प्रमुख निर्यातक देश है । कौशल और हुनर के अंतरण से दक्षिण अफ्रीका को निर्धनता उन्मूलन और आर्थिक विकास के अपने लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है ।

भारत में अगले सात वर्षों में सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण पर 50 अरब अमेरिकी डालर के व्यय का अनुमान हे, जबकि उर्जा के क्षेत्र में रख रखाव 40 अरब डालर के व्यय की संभावना है । विमान तलों और विद्युत उत्पादन जैसे क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता के कारण दक्षिण अफ्रीका इनमें भारत की काफी मदद कर सकता है ।

व्यापार संवर्धन के प्रयास

भारत एसएसीयू वरीय व्यापार समझौता

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच व्यापार को बढा़वा देने के लिए भारत एसएसीयू वरीय व्यापार समझौता पर बातचीत चल रही है । आगे चलकर भारत एसएसीयू और एमईआरसीओएसयूआर (मर्कोसुर - दक्षिण का एक वृहद मुक्त व्यापार क्षेत्र) के बीच एक व्यापक मुक्त व्यापार क्षेत्र के बारे में समझोता हो सकता हे । एसएसीयू और भारत के बीच अब तक चार दौर बातचीत हो चुकी है । पारस्परिक निवेश संवर्धन और संरक्षण समझौते पर भी वार्ता प्रक्रिया पूरी होने को है । इन समझौतों के अस्तित्व में आने के बाद दोनों देशों में व्यापार और निवेश को पर्याप्त बढा़वा मिलेगा ।

पुनर्गठित सीईओज फोरम

व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिये भारत दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख उद्योगपतियों का एक साझा मंच-भारत दक्षिण अफ्रीका सीईओज फोरम का गठन किया गया है । हाल ही में भारत के दौरे पर आए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जेउाएब ज़ुमा और भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनन्द शर्मा ने 3 जून, 2010 को मुंबई में इसका पुनर्गठन किया । भारत की ओर से इस मंच के अध्यक्ष प्रसिद्ध उद्योगपति श्री रतन टाटा हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका की ओर से श्री पैट्रिस मोर सेपे, इसके अध्यक्ष बनाए गए हैं ।

भारत व्यापार मंच

भारत व्यापार मंच (आईबीएफ) की शुरूआत 2007 में की गई थी । इसका मुख्यालय जोहान्सबर्ग में है। यह संस्था दक्षिण अफ्रीका स्थित भारतीय कंपनियों को भारत को ब्राांड के रूप में पेश करने और साझे सरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाने का मंच प्रदान करती है । आईबीएफ में इस समय 30 कंपनियां शामिल हैं । भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) इसका प्रबंध देखता हैं ।

भारतीय बैंकों (भारतीय स्टेट बेंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक आफ इंडिया और आईसीआईसीआई बैंक) की मौजूदगी ने आर्थिक गतिविधियों को बढा़वा दिया है । भारत सरकार के पर्यटन विभाग और राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के स्थानीय कार्यालय भी द्विपक्षीय सहयोग को प्रोत्साहित करने में सक्रिय हैं ।

चुनौतियां

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच व्यापार के जहां व्यापक अवसर हैं वहीं अनेक चुनौतियां भी हैं, जिन पर तुरंत ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है । भारत के अनेक व्यापारियों को दक्षिण अफ्रीका की वीजा देने की धीमी प्रक्रिया के बारे में काफी शिकायतें हैं । इससे व्यापार वृद्धि की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है । दक्षिण अफ्रीका सरकार ने इसमें सुधार का वचन दिया है परन्तु इसमें समय लगेगा । दक्षिण अफ्रीका ने वाहन और उनके कल पुर्जों के आयात में दिलचस्पी दिखाई है, परन्तु 36 प्रतिशत का आयात शुल्क इसमें प्रमुख बाधक है । कुछ भारतीय व्यापारियों ने बढत़े अपराधों पर भी चिंता जताई है । इससे व्यापारिक गतिविधियां असुरक्षित हो जाती हैं ।

भारत और दक्षिण अफ्रीका का अनेक वैश्विक मुद्दों पर साझा नजरिया है । ऐतिहासिक रूप से दोनों देशों के संबंध काफी पुराने हैं । ये संबंध प्राय: सभी क्षेत्रों में प्रगाढ रू़प अपनाए हुए हैं और इन्हें क्षेत्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है । इन संबंधों में और अधिक सुदृढत़ा , प्रगाढत़ा और विविधता लाने से दोनों देशों को भारी लाभ होगा (पीआईबी)।