विपणन आप्रेशन
ट्राईफेड ने ट्राइब्स इंडिया के नाम से 23 रिटेल आउटलेट्स के जरिए विपणन समर्थन स्थापित किया है जो जनजातीय हितों को समर्थन देने के लिए जनजातीय शिल्पकृतियों की विशिष्ट दुकान है और देश के महत्वपूर्ण स्थानों में है। इसके अतिरिक्त नाथूला दर्रे, लेह और गोवा सहित 14 स्थानों पर कनसाइनमेंट आउटलेट्स भी हैं।
ट्राइब्स इंडिया में बेहद उत्कृष्ट प्रमाणिक जनजातीय कला और शिल्प आइटमों तथा देशभर की जनजातियों के गढे़ हुए शल्प को प्रदर्शित किया जाता है। सभी उत्पाद पर्यावरण अनुकूल, प्राकृतिक रूप से उपलब्ध कच्चे माल से बने होते हैं तथा उनकी कीमत भी व्यावहारिक होती है। वर्ष 2005-06 में इन उत्पादों की बिक्री का कुल कारोबार 162.56 लाख रुपए था जो 2009-10 में बढक़र 688.20 लाख रुपए हो गया।
जनजातीय शिल्प की प्रदर्शनियां
ट्राईफेड नए शिल्पियों की पहचान करने और उन्हें आपूर्तिकर्ताओं के रूप में पैनल में शामिल करने के लिए जनजातीय शिल्पी मेले आयोजित करता है। वर्ष 2009 के दौरान ऐसे 7 मेले आयोजित किए गए जिनमें 14 राज्यों के 304 शिल्पियों ने शिरकत की। इस दौरान आदिशिल्प नामक 10 प्रदर्शनियां भी आयोजित की गर्इं। इन प्रदर्शनियों में कुल 162.57 लाख रुपए की बिक्री हुई।
कैनालाइजिंग एजेंसी के रूप में भूमिका
ट्राईफेड 1989 से गम कार्य के निर्यात के लिए देश में कैनालाइजिंग एजेंसी की भूमिका भी निभा रहा है। वर्ष 2009-10 में 22.83 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ जो पिछले वर्ष 19.90 करोड़ रुपए का था। गत वर्ष की तुलना में इस बार 15 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
प्रशिक्षण
कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण के लिए लघु वन्य उत्पाद एकत्र करने वालों तथा जनजातीय शिल्पियों के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके तहत महुए के फूल एकत्र करने , गोंद एकत्र करने , शहद निकालने , लैक उत्पादन, और दोना-पत्तल बनाने के बारे में जनजातीय महिला स्व सहायता समूहों को प्रशिक्षण देना शामिल है।
अनुसंधान एवं विकास
ट्राईफेड ने महुआ फूल, साल के तेल, साल डिऑयल केक, वन आधारित उत्पादों के उपयोग के लिए किण्वन हेतु मूल्य सवंर्धन के बारे में अनुसंधान एवं विकास कराया है तथा चुनिंदा लघु वन्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन और भंडारण के लिए कटाई बाद की प्रौद्योगिकी के विकास के लिए भी कार्य किया है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि ट्राईफेड अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के जरिए बने मूल्य वर्धित उत्पाद प्राप्त कर सके तथा उनका व्यावसायिक उत्पादन करा सके तो कच्चे माल के भाव बाजारी ताकतों के अनुसार स्वत: ही बढ ज़ाएंगे। वर्ष 2009-10 के दौरान छह विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के जरिए छह अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं शुरू की गयीं।
नई पहल
जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने जनजातीय कला और शिल्प के डिजाइन में सुधार करने तथा ट्राइब्स इंडिया को ब्रौंड के रूप में स्थापित करने के लिए राष्ट्र के प्रमुख फैशन संस्थान निपऊट के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इसी तरह से जन शिक्षा संस्थान के जरिए जनजातीय शिल्पकारों को प्रशिक्षित करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रौढ ़िशक्षा विभाग के साथ भी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
ट्राईफेड - जनजातियों का आर्थिक सशक्तिकरण
विशेष संवाददाता - 2010-07-07 12:03
जनजातीय दस्तकारों के उत्पादों और कौशल, खासतौर पर हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के लिए तथा अंतत: टिकाऊ बाजारों के सृजन के जरिए उनकी आय बढा़ने के उद्देश्य से भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राईफेड) पिछले कुछ वर्षों से अपनी गतिविधियों का निरंतर विस्तार कर रहा है।