नोएडा में मज़दूरों के विरोध प्रदर्शन के बाद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को मज़दूरों को भड़काने की कोशिश कर रहे “असामाजिक” तत्वों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने सचेत किया है कि लोगों को “लगभग खत्म हो चुके नक्सलवाद को फिर से ज़िंदा करने की साज़िश” से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा, “मज़दूरों के नाम पर उपद्रव करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और औद्योगिक इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए।” राज्य के श्रम विभाग को स्थानीय अधिकारियों और औद्योगिक इकाइयों से बातचीत करने के लिए कहा गया है।
हालांकि, मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा है कि हर मज़दूर को सम्मानजनक वेतन, काम करने का सुरक्षित माहौल और मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों से श्रम कानूनों का पालन करने और मज़दूरों द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुलझाने के लिए कहा।
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि पुलिस उन लोगों की पहचान कर रही है जिन्होंने नोएडा में मज़दूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हिंसा भड़काई थी, और चेतावनी दी कि उनके खिलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अशांति में शामिल “भड़काऊ तत्वों” और “बाहरी तत्वों” का पता लगाया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश एटीएस ने फैक्टरी कामगारों के विरोध प्रदर्शन से संभावित घुसपैठ के सूत्रों की जांच शुरू कर दी है। एटीएस यह जांच कर रही है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान आगजनी का तरीका, खासकर जिस तरह से गाड़ियों में आग लगाई गई, क्या पाकिस्तानी आकाओं के इशारे पर अशांति भड़काने के लिए इस्तेमाल किए गए तरीकों से मेल खाता है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने नोएडा में कामगारों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए भाजपा सरकार की "एकतरफा नीति" को जिम्मेदार ठहराया है, और आरोप लगाया है कि सरकार पूंजीपतियों का पक्ष लेती है जबकि वेतनभोगी कर्मचारियों और मजदूरों को नजरअंदाज करती है। उन्होंने कहा कि वेतन बढ़ाने को लेकर आंदोलन उन नीतियों की वजह से उग्र हो गया है जो "पूंजीपतियों को बढ़ावा देती हैं लेकिन कामगारों का शोषण करती हैं"।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने स्थिति को ठीक से न संभालने के लिए सरकार की आलोचना की और कहा कि नोएडा में मदरसन कंपनी के बाहर के विजुअल "परेशान करने वाले" थे। अपने एक्स पोस्ट में उन्होंने कहा, "जब महंगाई लोगों की कमर तोड़ रही है और वेतन के नाम पर कामगारों का शोषण हो रहा है, तो युवा सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।" उन्होंने यह भी कहा, “विज्ञापनों से खाली पेट नहीं भर सकते। आंसू गैस के गोले भूख मिटा नहीं सकते। वर्कर्स की जायज़ मांगों को नज़रअंदाज़ करना बंद करें और दमन का सहारा लेने के बजाय हल निकालें।”
ध्यान देने वाली बात यह है कि बेहतर वेतन के लिए आन्दोलन कर रहे मदरसन के सैकड़ों कामगार फैक्टरी के अंदर घुस गए और वरिष्ठ अधिकारियों को वहां से बाहर नहीं जाने दे रहे थे।
नोएडा के फेज़ 2 में प्रदर्शन हिंसक हो गया, और एक पुलिस वैन और दूसरी गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई, जहां कई औद्योगिक इकाइयों के कामगार दोपहर के आसपास वेतन बढ़ाने और दूसरे फायदों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बाद विरोध प्रदर्शन नोएडा के दूसरे हिस्सों में फैल गये। प्रदर्शन की वजह से सुबह से ही ट्रैफिक पर असर पड़ा है। कामगर पिछले कई दिनों से वेतन बढ़ाने और काम करने के बेहतर हालात की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहे थे, और उन्हें जो भरोसा दिया गया था, उसे पूरा नहीं किया गया।
12 अप्रैल को, अधिकारियों ने साप्ताहिक छुट्टी, ओवरटाइम के लिए दोगुना पारिश्रमिक, बोनस और बेहतर कार्यस्थल सुरक्षा जैसे उपायों की घोषणा की थी। इससे पहले, नोएडा की जिला दंडाधिकारी मेधा रूपम ने कामगारों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की थी। उन्होंने एक अपील जारी की थी, "सभी मज़दूर भाई-बहन, कृपया शांति से अपने काम की जगह पर पहुंचें और अपना काम करें, और ज़िले में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। अफ़वाहों पर ध्यान न दें।" उन्होंने मज़दूरों की मदद के लिए कंट्रोल रूम नंबर भी जारी किए हैं।
नोएडा में विरोध प्रदर्शन हरियाणा सरकार द्वारा 9 अप्रैल को न्यूनतम मज़दूरी में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा के बाद शुरू हुआ है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। घोषणा से पहले हरियाणा के गुरुग्राम के मानेसर में मज़दूरों ने न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने की मांग को लेकर 3 अप्रैल को अपना आंदोलन शुरू कर दिया था। मानेसर के बाद, नोएडा के मज़दूरों ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपनी न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने की मांग करते हुए अपना आन्दोलन शुरू कर दिया था।
नोएडा विरोध प्रदर्शन के असर से जल्द ही दिल्ली में स्थिति तनावपूर्ण हो गई और ट्रैफिक में रुकावट आयी। दिल्ली पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया और सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई, ताकि कोई भी असामाजिक तत्व मज़दूरों की आड़ में दिल्ली में घुस न सके। सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई और गाड़ियों की चेकिंग की गयी। दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह पूरी तरह से चौकस है, और सभी अहम जगहों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
विरोध प्रदर्शन जल्द ही और तेज़ हो गया और नोएडा के सेक्टर 62 स्थित चिल्ला बॉर्डर पर स्थिति गंभीर हो गई, जहां मज़दूरों ने सुबह के व्यस्त समय में सड़क जाम कर दी। इससे चिल्ला बॉर्डर (दिल्ली) से आने वाली नोएडा लिंक रोड पर ट्रैफिक बाधित हो गया।
उत्तर प्रदेश के मज़दूर संगठन दिल्ली-नोएडा सीमा के पास एकत्रित हुए और प्रदर्शन किया, जिससे सड़क के कई हिस्से जाम हो गए और गाड़ियों की आवाजाही में रुकावट आई। विरोध प्रदर्शन पड़ोसी शहर फरीदाबाद तक भी फैल गया, जिससे कई मुख्य रास्तों पर ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ। नोएडा में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए गाज़ियाबाद पुलिस को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
राजस्थान के भिवाड़ी में, सुप्राजित इंजीनियरिंग लिमिटेड के मज़दूरों का धरना-प्रदर्शन हिंसक हो गया और उन्होंने सड़क जाम करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस ने कई मज़दूरों को हिरासत में ले लिया है। (संवाद)
भारत में नोएडा से औद्योगिक अशांति की शुरूआत, दिल्ली-एनसीआर के कई राज्यों में फैली
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नक्सल आंदोलन के उभरने की आशंका
डॉ. ज्ञान पाठक - 2026-04-14 11:10 UTC
जैसे-जैसे भारत सरकार धीरे-धीरे नयी श्रम संहिताओं के नियमों को लागू कर रही है, भारतीय कामगारों में तनाव बढ़ता जा रहा है। सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से इसे पूरी तरह लागू करने के अपने इरादे की घोषणा की थी, और अब 13 अप्रैल, 2026 को उत्तर प्रदेश के नोएडा में औद्योगिक अशांति शुरू हो गई, जो शीघ्र ही दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में फैल गई, जिसमें हरियाणा के फरीदाबाद और मानेसर (गुरुग्राम), राजस्थान के भिवाड़ी, दिल्ली और कई दूसरी जगहें शामिल हैं। औद्योगिक इलाकों में न सिर्फ न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे मजदूरों ने सड़कें जाम कीं, बल्कि हिंसा, गाड़ियों में आग लगाना, पुलिस के साथ झड़प, पत्थरबाजी, फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की। उसके बाद भारी पुलिस बल की तैनाती भी हुई, जिन्होंने कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए लाठीचार्ज और बल का भी इस्तेमाल किया। पुलिस ने कहा कि वह स्थिति को काबू में रखने के लिए कम से कम बल का इस्तेमाल कर रही है।