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रुपये की गिरावट एक गंभीर चेतावनी, मोदी सरकार इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती

भारत के विकास के रूझान की विरोधाभासी स्थिति से पूरी गंभीरता से निपटना होगा
आर. सूर्यमूर्ति - 2026-05-23 10:38 UTC
भारत का रुपया सिर्फ़ कमज़ोर ही नहीं हो रहा है बल्कि यह एक ऐसी अर्थव्यवस्था की ढांचागत कमज़ोरियों के बारे में एक चेतावनी का संकेत दे रहा है, जिसने दो दशक तक विकास का जश्न मनाया, लेकिन आर्थिक मज़बूती, औद्योगिक विकास और बाहरी कमज़ोरियों जैसे ज़्यादा मुश्किल सवालों को टालती रही।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी आर्थिक संकट की असली स्थिति बताएं

सरकार एक 'श्वेत पत्र' जारी कर सुधार के आवश्यक उपाय करे
नीलोत्पल बसु - 2026-05-22 10:30 UTC
सत्य पर आवरण की दुनिया की दिक्कत यह है कि इसकी एक 'एक्सपायरी डेट' होती है। सच पर कुछ सीमित समय के लिए पर्दा डाला जा सकता है, हमेशा के लिए नहीं। आखिर में जीत सच की ही होती है। ऐसा लगता है कि अब वह हिसाब-किताब का वक्त आ गया है। इसके संकेत खुद प्रधानमंत्री की तरफ से साफ तौर पर मिले, जब उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि भारत के नागरिकों को अब 'अपनी कमर कसनी होगी' – यानी सरकार एक कठोर “मितव्ययिता के कदम” उठाने वाली है।

भारत को तेल की खपत पर रोक लगाने की ज़रूरत

घरेलू तेल खपत को कम करने का समय आ गया
नन्तू बनर्जी - 2026-05-20 10:40 UTC
दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद खुदरा तेल की खपत के तरीके पर रोक लगाने में भारत की लगातार हिचकिचाहट, अगर मंज़ूर नहीं है, तो समझ से बाहर है। सरकार, जो खुदरा तेल की कीमतों का करीब 50 प्रतिशत कर लगाकर सबसे अधिक लाभ उठाती है, ईंधन की खपत को कम करने के लिए तैयार नहीं है, जबकि देश लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है।

सतीशन को मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया कांग्रेस आलाकमान के लिए एक विशेष अनुभव

नाम तय करने में जनता की भावना और सहयोगियों के विचारों ने निभाई अहम भूमिका
कल्याणी शंकर - 2026-05-19 10:29 UTC
केरल के मुख्यमंत्री के चयन के दौरान कांग्रेस पार्टी को अपने ही खेमे में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस प्रक्रिया में 11 दिन लगे और यह पार्टी के अलग-अलग गुटों के बीच मतभेदों को सुलझाने में अहम साबित हुई, जिससे एकता के लिए आपसी सहमति के महत्व का पता चलता है।

नरेंद्र मोदी के ज़माने के चुनाव अब स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं माने जाते

सर्वोच्च न्यायालय ने भी पूछा – चुनाव आयोग की “स्वतंत्रता को लेकर यह दिखावा क्यों?”
डॉ. ज्ञान पाठक - 2026-05-18 11:02 UTC
विपक्ष हमेशा से यह दावा करता रहा है कि भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नियंत्रित कर रहे हैं और ईसीआई यह पक्का करने के लिए काम कर रहा है कि देश में भाजपा चुनाव जीते। उनका यह भी आरोप है कि ईसीआई की स्वायत्तता नहीं रही, जबकि मोदी सरकार ने कहा कि यह संवैधानिक संस्था स्वतंत्र है। अब भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा है कि ईसीआई की “स्वतंत्रता को लेकर यह दिखावा क्यों?” यह सवाल हमें फिर से सोचने पर मजबूर करता है कि क्या मोदी के ज़माने में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं, विशेषकर पिछले कई सालों में सर्वोच्च न्यायलय के फैसलों और टिप्पणियों के आलोक में? सर्वोच्च न्यायालय अभी चीफ इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर (अपॉइंटमेंट, कंडीशंस ऑफ़ सर्विस और टर्म ऑफ़ ऑफिस) एक्ट, 2023 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जो 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पास हुआ था। बेंच ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव एक सचमुच स्वतंत्र ईसीआई पर ही निर्भर करते हैं।

ऑनलाइन दुनिया में बच्चे कितने असुरक्षित?

मोबाइल स्क्रीन के भीतर बढ़ता खतरा
राजु कुमार - 2026-05-16 12:02 UTC
हाल ही में जारी एनसीआरबी के आंकड़े यह अगाह करते हैं कि पहले बच्चों के लिए खतरे सड़क और समाज में दिखते थे, अब वे जेब में रखे मोबाइल के भीतर भी मौजूद हैं। डिजिटल तकनीक, सोशल मीडिया और इंटरनेट ने बच्चों के लिए अवसरों की नई दुनिया खोली है, लेकिन इसके साथ ही उनके सामने ऐसे खतरे भी तेजी से बढ़े हैं, जिनकी कल्पना कुछ वर्ष पहले तक कठिन थी। यही वजह है कि देश में कुल अपराधों में गिरावट के दावों के बीच भी बच्चों के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं।

कोयला से गैस बनाने की प्रोत्साहन योजना समुचित कदम

मौजूदा ऊर्जा संकट के कारण तेल आयात में कमी अपरिहार्य
आर. सूर्यमूर्ति - 2026-05-15 10:31 UTC
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा कोयला और लिग्नाइट से गैस बनाने के लिए ₹37,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंज़ूरी देने को न तो केवल एक औद्योगिक सब्सिडी के तौर पर देखा जाना चाहिए, और न ही इसे भारत की कोयला अर्थव्यवस्था को एक अलग तकनीकी शब्दावली के तहत पुनर्जीवित करने का महज़ एक और प्रयास समझना चाहिए। बल्कि, इसे भारत के आर्थिक-सुरक्षा सिद्धांत के एक कहीं अधिक व्यापक और तेज़ी से उभरते पुनर्गठन के हिस्से के रूप में समझा जाना चाहिए। इस पुनर्गठन में राष्ट्रीय नीति में ऊर्जा-लचीलापन, आयात-प्रतिस्थापन, राजकोषीय-रूढ़िवादिता और भू-राजनीतिक जोखिम-प्रबंधन जैसे तत्व शामिल हो रहे हैं।

अमेरिका और चीन के बीच सत्ता की लड़ाई का अखाड़ा बन रहा है पूर्वोत्तर भारत

मोदी को ट्रंप का अनोखा संदेश, असम में अमेरिकी दूत की मौजूदगी अशुभ संकेत
नित्य चक्रवर्ती - 2026-05-14 11:25 UTC
भारत के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में हो रहे घटनाक्रमों पर वॉशिंगटन का ध्यान तेज़ी से बढ़ रहा है। इसकी वजह चीन की वे सुनियोजित चालें हैं जिनके ज़रिए वह बांग्लादेश और म्यांमार में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है। ये दोनों देश भारत के राज्यों से सटे हुए हैं। 4 मई को बंगाल और असम चुनावों में भाजपा की जीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया अनोखा संदेश, और 12 मई को असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के शपथ ग्रहण समारोह में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की सक्रिय भागीदारी — ये सभी पूर्वोत्तर में अमेरिकी हितों के बढ़ने के अशुभ संकेत हैं।

मितव्ययिता की प्रधानमंत्री की सलाह अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण खोने का संकेत

विपक्ष का यह कहना सही है कि मोदी शासन जवाबदेही से बचना चाहता है
टी एन अशोक - 2026-05-13 10:47 UTC
नई दिल्ली: जैसे-जैसे ईरान में युद्ध गहराता जा रहा है और आग की लपटें पश्चिम एशिया के ऊर्जा गलियारों में फैल रही हैं, भारत खुद को एक असहज सच्चाई का सामना करते हुए पा रहा है। इसकी आर्थिक कमजोरियां दूर समुद्री मार्ग से यात्रा करने वाले तेल टैंकरों से जुड़ी हुई हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बाधित शिपिंग लेन, विमानन ईंधन की बढ़ती लागत, उर्वरक आयात पर आशंका और घबराए बाजारों ने नरेंद्र मोदी सरकार को संकट-प्रबंधन के मोड़ में धकेल दिया है।

ऊर्जा क्षेत्र के बदलावों के बीच भेल की बदलती दिशा

दो वर्षों की उपलब्धियों ने भेल के प्रति बढ़ाया भरोसा
राजु कुमार - 2026-05-12 11:55 UTC
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) की भोपाल इकाई के हालिया वित्तीय और उत्पादन संबंधी आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र का यह उपक्रम पिछले कुछ वर्षों की चुनौतियों के बाद अपनी परिचालन स्थिति को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में बदलती तकनीकों, निजी क्षेत्र की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ऑर्डर आधारित बाजार व्यवस्था के बीच वित्त वर्ष 2025-26 के परिणाम बीएचईएल के लिए अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति की ओर इशारा करते हैं।
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