अमेरिका और कनाडा की सीमा पर एक झील है ओंटारियो और इसी के नाम पर कनाडा का एक प्रांत भी है। अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे टैरिफ वार में अब एक नया मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और अमेरिका की सीमा पर स्थित लेक ओंटारियो का नाम बदलकर उसे ‘लेक अमेरिका’ करने का ऑर्डर जारी कर दिया। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अमेरिका का दबदबा बनाए रखने के लिए ट्रंप जिन नए औजारों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें पहला नंबर टैरिफ वार का है और दूसरा, हर चीज पर अमेरिका का ठप्पा लगाना।
इसमें झील का नाम बदलना और सोशल मीडिया पर एआई-जेनेरेटेड भद्दा सा वीडियो डालकर ट्रंप ने दरअसल अपनी सोच को खुद ही खोलकर दुनिया के सामने रख दिया है। इस वीडियो में ट्रंप लेक ओंटारियो के बोर्ड को पैर से फेंकते हैं और वहां ‘लेक अमेरिका’ का साइन बोर्ड लगाते हैं। देखकर लगता है मानो बच्चों की हठधर्मिता का खेल चल रहा है। जवाब में ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने झील के किनारे नया साइन बोर्ड लगवाया—‘लेक ओंटारियो—अभी और हमेशा’। लेक ओंटारियो, अमेरिका और कनाडा के बीच स्थित पांच ग्रेट लेक्स में से एक है, जिसका कुल क्षेत्रफल करीब 18,960 वर्ग किलोमीटर और लंबाई करीब 311 किलोमीटर है। इसी झील के नाम पर कनाडा के प्रांत ओंटारियो का नाम पड़ा है। अमेरिका के अस्तित्व में आने से बहुत पहले से इस झील का नाम ओंटारियो रहा है। इसका नाम मूल निवासी वेंडाट/ह्यूरॉन भाषा के ‘ओनियातारियो’ शब्द से निकला माना जाता है, जिसका एक प्रचलित अर्थ ‘चमकते पानी की झील’ है। ट्रंप द्वारा इसका नाम बदले जाने पर कनाडा की ओर से भी यही याद दिलाया गया कि जब यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका का जन्म नहीं हुआ था, यह झील तब भी मौजूद थी।
एक दिलचस्प सवाल यह भी है कि क्या ट्रंप वाकई दुनिया भर के लिए लेक ओंटारियो का नाम अपने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से बदल सकते हैं। इसका जवाब है—नहीं। वह अमेरिका के संघीय प्रशासनिक कामकाज, दस्तावेजों और नक्शों के लिए जरूर इसका नाम बदल सकते हैं, लेकिन उनका आदेश कनाडा पर लागू नहीं होता और वहां यह झील लेक ओंटारियो के नाम से ही जानी जाएगी। इसी तरह पहले ट्रंप ने मनमानी करते हुए मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कर दिया था, जिस पर मैक्सिको ने सख्त ऐतराज किया था। गूगल मैप्स पर भी इसे लेकर विवाद हुआ। अमेरिका में मैप देखने वालों को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’, मैक्सिको में ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ और बाकी दुनिया में दोनों नाम दिखाई देने लगे। अब लेक ओंटारियो के मामले में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। अमेरिका में गूगल मैप्स पर नया नाम ‘लेक अमेरिका’ दिखाई दे रहा है, जबकि कनाडा में ‘लेक ओंटारियो’ और दूसरे देशों में दोनों नाम दिखाए जा रहे हैं। यानी मैक्सिको की खाड़ी के नाम पर ट्रंप की हठ पूरी दुनिया में नहीं चली, तो कनाडा के साथ साझा इस झील पर भी उनका आदेश दुनिया के लिए नया नाम तय नहीं कर सकता।
दरअसल, ट्रंप की लोकप्रियता ईरान के साथ युद्ध के बाद अमेरिका में अपने न्यूनतम स्तर तक पहुंच चुकी है। हालिया सर्वेक्षणों में उनकी अप्रूवल रेटिंग करीब 33 फीसदी तक गिर गई है। लिहाजा सवाल उठता है कि क्या ये सारे ट्रिक्स यानी हथकंडे अपनाकर वे चर्चा में बने रहना चाहते हैं और घरेलू राजनीतिक दबाव के बीच एजेंडा बदलने की कोशिश कर रहे हैं। जो इस समय बहुत मुश्किल दिखाई दे रहा है।
ट्रंप इस समय अपने पड़ोसी देश कनाडा को झुकाने के लिए सारे हथकंडे इस्तेमाल करने पर उतर आए हैं। लेकिन कनाडा भी ट्रंप कार्ड के जवाब में अपना मास्टर कार्ड खेल रहा है। अमेरिका के टैरिफ के जवाब में उसने भी अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने ओंटारियो झील का नाम बदला, तो कनाडा के ओटावा शहर की काउंसिल में ‘ट्रंप एवेन्यू’ का नाम बदलने पर भी विचार चल रहा है। इस तरह दो देशों के बीच खींचातानी कहीं से भी स्थापित अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के स्तर की नहीं लग रही है। लेकिन 20 जनवरी 2025 को जब से ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति का पदभार दोबारा संभाला, तब से इस तरह की कार्रवाइयां उनकी कूटनीति का हिस्सा बन गई हैं। किसी को भी नहीं पता रहता कि ट्रंप कब क्या कदम उठाएंगे। अपने इन कदमों और दूसरे फैसलों की वजह से ट्रंप की साख भी न्यूनतम स्तर तक पहुंच चुकी है।
अमेरिका और कनाडा के बीच जो टैरिफ युद्ध शुरू हुआ है, उसके इसी तरह के वार-प्रतिवार में तब्दील होने की आशंका है। अमेरिका और कनाडा के बीच चल रही व्यापार वार्ता टूटने के बाद दोनों देशों में ठन गई है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता का ताजा दौर 21 अगस्त को विफल हो गया और इसके बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 28 अरब कनाडाई डॉलर यानी लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाने की घोषणा की। ट्रंप ने कनाडा के ऑटोमोबाइल और स्टील क्षेत्र पर भी टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि कनाडा, अमेरिका का राज्य बने बिना ही राज्य होने के सारे फायदे चाहता है। यह कनाडा के जले पर नमक छिड़कने जैसा बयान था।
इसका कड़ा जवाब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दिया। उन्होंने कहा कि कनाडा ट्रंप के टैरिफ का जवाब ‘डॉलर के बदले डॉलर’ के अंदाज में देगा। कनाडा ने 8 सितंबर से चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों पर 15, 25 और 50 फीसदी की दर से जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिनकी दर संबंधित अमेरिकी टैरिफ के अनुरूप होगी। कार्नी ने कहा कि अब अमेरिका और कनाडा एक टैरिफ वार में हैं। फिलहाल ये टैरिफ वार और नाम बदलने की जंग किसे कितना फायदा पहुंचाएगी, यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना साफ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की साख इस समय बुरी तरह गिरी हुई है। (संवाद)
विश्व कूटनीति में अमेरिकी दबदबा बनाए रखने के ट्रंप के नए हथकंडे
लेक ओंटारियो का नाम बदलने और टैरिफ वार तेज करने से क्या वाकई अमेरिका को फायदा होगा?
भाषा सिंह - 2026-09-02 14:37 UTC
दुनिया के साथ अमेरिकी नागरिक भी परेशान हैं ट्रंप की नई लत से। जगहों के नाम बदलने की। पहले गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम बदला और अब कनाडा और अमेरिका की सीमा पर स्थित लेक ओंटारियो का नाम बदल दिया। सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रंप विश्व कूटनीति में अमेरिका का दबदबा बनाए रखने के लिए ये सारे ऊट-पटांग हथकंडे इस्तेमाल कर रहे हैं। दुनिया ट्रंप के टैरिफ वार के कई चरण देख चुकी है, जिसके निशाने पर भारत भी रहा। इस समय टैरिफ युद्ध के निशाने पर अमेरिका का पड़ोसी देश कनाडा बना हुआ है। ट्रंप के टैरिफ के जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ की घोषणा की, फिर ट्रंप की बौखलाहट और बढ़ गई। उन्होंने कनाडा के ऑटोमोबाइल और स्टील क्षेत्र पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर हड़कंप मचा दिया।