एन.डी.आर.आई. करनाल ने नए एवं विकसित हस्त-निर्देशित क्लोनिंग तकनीक के माध्यम से आज सुबह यह उपलब्धि हासिल की। एन.डी.आर.आई. में विकसित हस्त-निर्देशित क्लोनिंग तकनीक 'पारंपरिक क्लोनिंग तकनीक' का एक विकसित संशोधित रूप है।
क्लोन किया गया यह बछड़ा 41 किलोग्राम का है जिसे डॉक्टरों के एक दल द्वारा हल्की मदद के बाद सामान्य प्रसव से पैदा किया गया। यह क्लोन बछड़ा पिछड़े क्लोन बछड़ों से भिन्न है क्योंकि इस मामले में पालक माता को सामान्य प्रसव का अवसर दिया गया। इस क्लोन बछड़ों को दो सप्ताह की आयु के बछड़े के कान की दैहिक कोशिका से लिया गया था। इससे पहले दो बछड़ों को सीजेरियन ऑपरेशन के माध्यम से पैदा किया गया था और उनको क्रमश: भ्रूण एवं भ्रूण स्टेम सेल (कोशिका) से ली गई कोशिकाओं के माध्यम से पैदा किया गया था।
इससे पहले एन.डी.आर.आई ने 6 फरवरी, 2009 को विश्व का पहला क्लोन भैंस-बछड़ा पैदा किया था, जिसके बाद 6 जून, 2009 को दूसरा एवं 22 अगस्त, 2010 को तीसरा क्लोन पैदा किया था।
भारत
क्लोन से जन्मा भैंस का एक नर बछड़ा
विशेष संवाददाता - 2010-08-26 11:25 UTC
नई दिल्ली: राष्ट्रीय दुग्ध अनुसंधान संस्थान, एन.डी.आर.आई, करनाल ने क्लोन के माध्यम से भैंस के एक नर बछड़े का जन्म कराने में सफलता हासिल की। इस बछड़े का नाम 'श्रेष्ठ' रखा गया है।