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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में फी वृद्धि

देश के गरीब मेधावी छात्रों पर करारा हमला
सी आधिकेशवन - 2019-11-16 09:57 UTC
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र सत्ताधारी शासन के खिलाफ लामबंद हैं। संघ परिवार की फासीवादी विचारधारा और अत्याचार से एक बार फिर जेएनयू पर हमला हो रहा है। फीस वृद्धि भारत में शिक्षा का व्यवसायीकरण और निगमीकरण करने के लिए केंद्र सरकार की मसौदा शिक्षा नीति का परिणाम है। जबरदस्त फीस वृद्धि यह सुनिश्चित करेगी कि जेएनयू केवल कुछ अमीर छात्रों के लिए पात्रता वाला विश्वविद्यालय बन जाएगा, जबकि एक विशाल बहुमत को सस्ती शिक्षा से वंचित कर दिया जाएगा। वर्तमान शुल्क वृद्धि प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक संस्थान में लगभग मुफ्त शिक्षा प्राप्त करने वाले गरीब छात्रों के लिए एक झटका है।

क्या झारखंड में भाजपा का बेड़ा राम पार लगाएंगे?

जमीनी राजनीति तो इसके खिलाफ ही है
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-11-15 09:58 UTC
झारखंड विधानसभा के चुनाव की घोषणा के बाद अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का निणर्य आया और उसके बाद विवादित स्थल पर राम मन्दिर का निर्माण की सारी बाधाएं समाप्त हो गई हैं। वहां राम मन्दिर का निर्माण भाजपा के एजेडें पर बहुत सालों से रहा है, हालांकि गठबंधन की राजनीति के तहत उस एजंेडे को वह स्थगित कर दिया करती थी। कहने की जरूरत नहीं कि वह एक राजनैतिक मुद्दा था और उस मुद्दे पर अंततः भाजपा जीत गई। उस जीत को वह झारखंड विधानसभा के चुनाव में भुनाना चाहेगी। सवाल उठता है कि क्या भाजपा वहां इसका चुनावी फायदा उठा पाएगी?

कांग्रेस के लिए शिवसेना कभी अछूत नहीं रही

पहले भी वे एक दूसरे की मदद करती रही हैं
अनिल जैन - 2019-11-14 10:15 UTC
महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू होने से पहले चले घटनाक्रम में जब शिवसेना और कांग्रेस के साथ आने की संभावनाएं बन रही थीं तो टेलीविजन चैनलों पर कई राजनीतिक विश्लेषक और टिप्पणीकार हैरानी जता रहे थे। सभी का कहना था कि अगर कांग्रेस और शिवसेना साथ आते हैं तो यह भारतीय राजनीति में अनोखी घटना मानी जाएगी और इससे अभूतपूर्व अवसरवाद की मिसाल कायम होगी। अपने उग्र हिंदुवादी तेवरों के लिए जानी जाने वाली शिवसेना का भाजपा से करीब 30 साल पुराना नाता तोड़कर एनसीपी और कांग्रेस हाथ मिलाने की संभावना ने राजनीतिक विश्लेषकों से इतर कई आम लोगों को भी हैरान किया। मगर सवाल है कि क्या वाकई शिवसेना और कांग्रेस राजनीतिक तौर पर एक-दूसरे के लिए वैसे ही अछूत हैं, जैसा कि उन्हें समझा जा रहा है?

नेहरू की नजर में गांधी

समाजवादी नेहरू गांधी के अनुयाई क्यों थे
एल. एस. हरदेनिया - 2019-11-13 10:05 UTC
आधुनिक भारत को जिन दो महान व्यक्तियों ने सर्वाधिक प्रभावित किया वे हैं महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू। जहां गांधी ने भारत को आजाद कराने मंे महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी वहींे जवाहरलाल नेहरू ने आजाद भारत के चहुंमुखी विकास में उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। गांधी और नेहरू की आयु में पूरे 20 वर्ष का अंतर था। गांधी का जन्म सन् 1869 में हुआ था वहीें नेहरू का 1889 में। यह अंतर लगभग एक पिता और पुत्र की आयु के अंतर के बराबर था। इसलिए गांधी ने नेहरू को अपना पुत्र ही माना।

करतारपुर एक अच्छी पहल

आशंकाओं में लिपटा उम्मीदों का ऐतिहासिक गलियारा
अनिल जैन - 2019-11-11 17:14 UTC
नौ नवंबर 1989 को पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी को बांटने वाली बर्लिन की दीवार गिराने की शुरुआत हुई थी। 30 साल बाद 9 नवंबर को ही पाकिस्तान और भारत के बीच बना करतारपुर गलियारा भारत के सिक्ख श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। दुनिया के दो महाद्वीपों में घटी इन दो ऐतिहासिक घटनाओं के बीच सिर्फ अंतर 30 साल का ही नहीं हैं बल्कि और भी कई सारें फर्क हैं। मगर सबसे मोटा फर्क यह है कि जर्मनी की उस घटना से दो देशों के फिर से एक होने की शुरुआत हुई थीे। पर करतारपुर गलियारा खुलने से वैसा कुछ नहीं होने जा रहा। इस गलियारे से सिर्फ भारत के सिख श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित अपने सबसे बडे आस्था स्थल पर मत्था टेकने जा सकेंगे। इसके बावजूद इस घटना के ऐतिहासिक महत्व को नकारा नहीं जा सकता।

अयोध्या पर सुप्रीम फैसला

क्या अब काशी और मथुरा विवाद को खोला जाएगा?
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-11-09 11:24 UTC
अयोध्या मसले पर सुप्रीम फैसला आ गया है और इसके साथ करीब पौने दो साल पुराना विवाद समाप्त हो गया है। ज्ञात इतिहास में पहला विवाद 1850 के दशक में शुरू हुआ था। 1880 के दशक में एक अदालती आदेश ने वह विवाद समाप्त कर विवादित स्थल के एक हिस्से पर हिन्दुओं को दूसरे हिस्से पर मुसलमानों को क्रमशः पूजा करने और नमाज पढ़ने का अधिकार दे दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले मे उस अदालती फैसले की प्रतिध्वनि सुनाई पड़ती है।

नागरिकों के निजता अधिकार पर मोदी सरकार की दो मुही बात

उसके द्वारा व्हाट्सएप की आलोचना का कोई मतलब नहीं
के रवीन्द्रन - 2019-11-07 12:28 UTC
कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारतीयों की गोपनीयता भंग करने के लिए व्हाट्सएप को फटकार लगाई है। यह शैतान द्वारा भगवान की शपथ खाने की तरह है।

कमलनाथ ने केन्द्र के खिलाफ धरना की धमकी दी

किसानों की मांग पर मुख्य फोकस
एल. एस. हरदेनिया - 2019-11-06 09:38 UTC
भोपालः अगर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली में अपने सहयोगीें मंत्रियों के साथ एक दिन का विरोध प्रदर्शन करने की धमकी पर अमल कर देते हैं, तो यह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच टकराव के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ देगा।

चिंता और अनर्गल प्रलाप के बीच बढ़ती आबादी की हकीकत

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सरकार की नाकामी से ध्यान हटाने का उपक्रम
अनिल जैन - 2019-11-05 11:17 UTC
बढती जनसंख्या एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हाल में ही भाजपा की असम सरकार ने ऐलान किया है कि असम में 1 जनवरी, 2020 से उन लोगों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी, जिनकी दो से ज्यादा संतान हैं। इसके बाद बहस चल पडी है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकार को सख्त कानून बनाना चाहिए। दो राय नहीं कि तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों के लिए भी चिंता का सबब है। जिस गति से जनसंख्या बढ़ रही है, उसके लिए जीवन की बुनियादी सुविधाएं और संसाधन जुटाना तथा रोजगार के अवसर पैदा करना चुनौती साबित हो रहा है।

प्रदूषण के गुनाहगार

जिम्मेदारी तो तय होनी ही चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-11-04 10:25 UTC
पिछले कई सालों से प्रदूषण दिल्ली की एक बहुत बड़ी समस्या रही है। इसे हल करने की कोशिश में सुप्रीम कोर्ट ने तो एक बार डीजल से चलने वाले सार्वजनिक वाहनों को पूरी तरह दिल्ली में बंद भी करवा दिया था। सरकारी स्तर पर भी पेड़ लगाने का काम शुरू हुआ था और आज दिल्ली पहले से ज्यादा हरी भरी है। लेकिन उन प्रयासों के बावजूद प्रदूषण का मर्ज बद से बदतर होता जा रहा है। पिछले कुछ सालों से प्रदूषण ने यहां मारक रूप अख्तियार कर लिया है और इसके कारण कितने लोग मर रहे हैं, उसका सही आंकड़ा तक सरकार के पास नहीं है।