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क्या कर्ज माफी से मिलेगी किसानों को राहत

किसानों को मुश्किल में डाल दे कर्ज माफी
राजु कुमार - 2019-01-16 17:19 UTC
किसानों के कर्ज माफी एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। पिछले साल संपन्न विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने यह घोषणा की थी कि उसकी सरकार आने पर किसानों के कर्ज माफ किए जाएंगे। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से भाजपा को बेदखल करने में कांग्रेस की इस घोषणा का बड़ा हाथ रहा है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते ही कमलनाथ ने सबसे पहले कर्ज माफी की फाइल पर दस्तख्त किए। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि यदि 10 दिन में कर्जमाफी पर अमल नहीं हुआ, तो मुख्यमंत्री को बदल दिया जाएगा। मध्यप्रदेश में ऐसी नौबत तो नहीं आई, लेकिन कर्ज में डूबे प्रदेश सरकार के लिए कर्ज माफी के लिए रकम जुटाना आसान नहीं है और यही वजह है कि इस योजना को स्वरूप देते-देते महीना भर का समय लग गया। अब मध्यप्रदेश सरकार ने ऋण माफी के लिए आवेदन पत्र जमा करना शुरू कर दिया है और मुख्यमंत्री कमलनाथ का कहना है कि फरवरी के अंत तक पात्र किसानों के खाते में दो लाख रुपए तक की कर्ज माफी की रकम पहुंच जाएगी।

उत्तर प्रदेश में बुआ-बबुआ की जोड़ी

किस करवट बैठेगा ऊंट?
योगेश कुमार गोयल - 2019-01-15 16:42 UTC
लोकसभा को करीब 15 फीसदी सीटें देने वाले देश के बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में ‘बुआ-बबुआ’ का 38-38 सीटों पर गठबंधन हो जाने और देशभर में महागठबंधन बनाने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस के इस सूबे में अलग-थलग पड़ जाने के बाद एक बार फिर यह बात आईने की तरह साफ हो गई है कि भारतीय राजनीति में न कोई किसी का स्थायी दुश्मन है और न दोस्त और न ही भारतीय राजनीति में नैतिकता और शुचिता नाम की कोई चीज शेष रह गई है। सपा-बसपा गठबंधन के बाद अब हर किसी की नजरें इसी राज्य की भावी राजनीति पर केन्द्रित हैं। दरअसल महागठबंधन बनाने के प्रयासों में जुटे विपक्षी दलों की यही कोशिश रही है कि किसी भी प्रकार भाजपा को सत्ता से बाहर किया जा सके और इस लिहाज हर किसी की नजरें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश पर ही टिकी थी क्योंकि कुल 545 सीटों वाली लोकसभा में 80 सीटें अकेले उत्तर प्रदेश से ही हैं, जिनमें 63 सामान्य और 17 आरक्षित सीटें हैं।

खसरा और रूबेला टीकाकरण से कोई भी बच्चा छूट न पाए

टीकाकरण की सफलता बच्चों को बीमारियों से रखेगी दूर
राजु कुमार - 2019-01-14 18:25 UTC
कल से मध्यप्रदेश में खसरा और रूबेला टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ होने जा रहा है। अभियान अगले एक माह तक चलाया जाएगा। यह देशव्यापी मीजल्स और रूबेला टीकाकरण अभियान का हिस्सा है। अभियान के तहत 9 माह से 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को टीका लगाया जाएगा। इसमें सरकारी एवं निजी शालाओं, अस्पताल एवं अन्य संस्थाओं को शामिल किया गया है, जिससे कि कोई बच्चा छूटने न पाए। मध्यप्रदेश आज भी देश के उन राज्यों में शुमार है, जहां कुपोषण, शिशु मृत्यु दर एवं बाल मृत्यु दर ज्यादा है। निमोनिया, डायरिया, खसरा जैसी बीमारियां भी बच्चों की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। लेकिन पिछले दो-तीन सालों से बाल स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार दिखाई दे रहा है। इसका एक बड़ा कारण है टीकाकरण के प्रति लोगों में आई जागरूकता।

मध्यप्रदेश विधानसभा में परंपरा का उल्लंघन

अच्छा होता भाजपा ने अपना स्पीकर उम्मीदवार नहीं दिया होता
एल. एस. हरदेनिया - 2019-01-14 18:21 UTC
भोपालः "संविधान के अनुसार स्पीकर की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। परंतु परंपरा और व्यवहार के कारण स्पीकर की स्थिति संवैधानिक प्रावधानों से भी ऊँची और महत्वपूर्ण है"। ये शब्द हैं देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जो उन्होंने संसदीय प्रजातंत्र में स्पीकर की स्थिति का मूल्यांकन करते हुए कहे थे।

हंगामे के बीच मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र संपन्न

कांग्रेस और भाजपा ने एक दूसरे के खिलाफ परंपरा तोड़ने का लगाया आरोप
एल एस हरदेनिया - 2019-01-12 11:03 UTC
भोपालः नवगठित मध्यप्रदेश विधानसभा का पहला सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। चार दिवसीय सत्र को अप्रिय दृश्य, आरोप प्रत्यारोप और विपक्ष द्वारा वाकआउट की एक श्रृंखला के रूप में याद किया जाएगा।

क्या मध्यप्रदेश भाजपा में पनप रही है गुटबंदी

सदन के बाहर और भीतर फेल हुई भाजपा
राजु कुमार - 2019-01-12 10:31 UTC
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार यह कहते रहे हैं कि उन्हें प्रदेश में राजनीति करनी है। कई बार केन्द्र में जाने की अटकलों को वे खुलकर नकारते रहे। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई वाली केन्द्र सरकार में कभी कृषि मंत्री, तो कभी पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में उनके जाने की अटकलें लगती रही और वे इसे खारिज करते रहे। अभी संपन्न मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने उनके चेहरे पर ही चुनाव लड़ा। ऐसे में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ-साथ शिवराज को भी भाजपा ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर केन्द्र की राजनीति में बुला लिया। मध्यप्रदेश में ही रहकर ताउम्र राजनीति करने की बात करने वाले शिवराज सिंह चौहान अब राज्य की राजनीति से दूर हैं। विधानसभा चुनाव हारने के बाद तीनों राज्यों में भाजपा के एकछत्र नेता के रूप में स्थापित इन नेताओं को राष्ट्रीय राजनीति में बुला लिए जाने को राजनीतिक विश्लेषक भाजपा में गुटबंदी पनपने की बात करने लगे हैं।

अनारक्षितों को 10 फीसदी आरक्षण बहुजन राजनीति का अंत

उपेन्द्र प्रसाद - 2019-01-11 12:11 UTC
मोदी सरकार द्वारा अनारक्षित समुदायों की कम आय वाले लोगों को आरक्षण देकर सामाजिक बदलाव को एक नई दिशा दे दी है। जाति आधारित भारतीय समाज पर इसका जबर्दस्त असर पड़ेगा और यह बदलाव सकारात्मक ही होगा। 1990 में वीपी सिंह सरकार द्वारा मंडल आयोग की कुछ सिफारिशों के लागू किए जाने के बाद भी समाज पर जबर्दस्त असर पड़ा था और उस असर को आजतक महसूस किया जा सकता है।

लोकसभा चुनावः कमजोर हो रही हैं सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं

डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2019-01-10 10:31 UTC
सन् 2018 के अंतिम दौर में हुये विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता वाले तीन राज्यों में हुये सत्ता परिवर्तन के उपरान्त वर्ष 2019 में होने वाले आमचुनाव में केन्द्र में सत्ता परिवर्तन होने की उम्मीदें राजनीतिक धरातल पर की जाने लगी, जिसकी आहट वर्तमान केन्द्र की भाजपा सरकार को अंदर से अंदर ही बौखलाहट पैदा कर दी। उसे भी आभास भी होने लगा कि विरोधी तेवर सन् 2019 के आमचुनाव में कहीं सत्ता से उसे दूर न कर दें । इसी कारण मोदी सरकार आमजन को अपने पक्ष में कर आमचुनाव में जनमत को हासिल करने के प्रयास में सक्रिय होती दिखाई दे रही है।

युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद

देश के विकास की रीढ़ होते हैं युवा
योगेश कुमार गोयल - 2019-01-09 11:07 UTC
स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को ही प्रतिवर्ष ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जो बहुत कम आयु में अपने विचारों के चलते समस्त जगत में अपनी एक विशेष पहचान बनाने में सफल हुए थे। स्वामी जी युवाओं के प्रेरणास्रोत और आदर्श व्यक्त्वि के धनी थे, जिन्हें उनके ओजस्वी विचारों और आदर्शों के कारण ही जाना जाता है। वे आधुनिक मानव के आदर्श प्रतिनिधि थे और खासकर भारतीय युवाओं के लिए उनसे बढ़कर भारतीय नवजागरण का अग्रदूत अन्य कोई नेता नहीं हो सकता। अपने 39 वर्ष के छोटे से जीवनकाल में स्वामी जी अलौकिक विचारों की ऐसी बेशकीमती पूंजी सौंप गए, जो आने वाली अनेक शताब्दियों तक समस्त मानव जाति का मार्गदर्शन करती रहेगी। उनका कहना था कि मेरी भविष्य की आशाएं युवाओं के चरित्र, बुद्धिमत्ता, दूसरों की सेवा के लिए सभी का त्याग और आज्ञाकारिता, खुद को और बड़े पैमाने पर देश के लिए अच्छा करने वालों पर निर्भर है।

आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण

क्या सुप्रीम कोर्ट में यह टिक पाएगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-01-08 09:32 UTC
मोदी सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर अनारक्षित तबकों को दिए जा रहे आरक्षण को लेकर एक सवाल यह खड़ा किया जा रहा है कि यह सुप्रीम कोर्ट में टिक ही नहीं पाएगा, क्योंकि पहले भी इस तरह के निर्णय कोर्ट द्वारा खारिज कर दिए गए हैं। अनेक राज्यों ने समय समय पर आंदोलनों के दबाव में आर्थिक आधार पर आरक्षण के फैसले किए और हमेशा सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालयों ने उन्हें खारिज कर दिया। अनेक बार अनारक्षित जातियों को ओबीसी श्रेणी का कहकर भी आरक्षण देने की कोशिश की गई, लेकिन वे सारी कोशिशें भी नाकाम रहीं।