उभर रहे हैं नए राजनीतिक समीकरण
कोलकाता रैली से भाजपा विरोध को नई मजबूती मिली
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2019-01-21 09:37 UTC
विपक्षी पार्टियों की कोलकाता रैली ने विपक्ष की एकता सिद्ध कर दी है। इसने २०१९ के चुनावों के संघर्ष की तस्वीर भी साफ कर दी। भारतीय जनता पार्टी इस उम्मीद में थी कि यह संभव नहीं हो पायेगा। लेकिन एकता सिर्फ जमीन पर ही नहीं उतरी है, बल्कि इससे जुड़े संकल्प भी दिखाई दे रहे हैं। लेकिन एकता रैली इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण कहानी बता रही है। यह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अकेला हो जाने की कहानी। देश के प्रधानमंत्री पद पर शायद ही ऐसा कोई आदमी पहले रहा हो जिसे अपना हर छोटा बड़ा बचाव खुद ही करना पड़ा हो। उन्होंने गुजरात के नजदीक सिलवासा में एक कार्यक्रम में कोलकाता रैली का जिस तरह मजाक बनाने की कोशिश की, उससे उनकी बेचारगी ही सामने आई। विपक्षी नेता उन पर जमकर हमले कर रहे हैं, लेकिन उनके बचाव में भारतीय जनता पार्टी के तय हमलावरों के अलावा कोई सामने नहीं आ रहा है। भाजपा में बहुत सारे लोग हैं जो इस तमाशे का खामोशी से आंनद भी ले रहे हैं। एनडीए का कोई दल उनके लिए खड़ा नहीं होता और शिव सेना जैसे सहयोगी तो विपक्ष के साथ ही खड़े हो जाते हैं। चुनाव के नजदीक आने पर हमले बढेंगे और प्रधानमंत्री का अकेलापन बढ़ेगा। उन्हें भाजपा के पहले प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी को याद करना चाहिए। ऐसे में उनके व्यवहार के कारण विरोधियों को भी उन पर हमला करने में संकोच होता था।