Skip to main content

View Articles

कश्मीर पर केंद्र की समझदारी विकसित होने का संकेत

घाटी के लोगों को सूबे की साझा सरकार पर कतई भरोसा नहीं
अनिल जैन - 2017-10-30 11:09 UTC
जम्मू-कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार ने दुविधा के घेरे तथा अपने ‘सैन्यवादी’ सोच के दायरे से बाहर निकलकर आखिरकार संवाद करने का फैसला किया है। इस सिलसिले में उसने खुफिया ब्यूरो के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा को अपना प्रतिनिधि चुना है। केंद्र सरकार के ये नए वार्ताकार कई दशकों से अलगाववाद और आतंकवाद की आग में झुलस रहे इस सूबे के विभिन्न क्षेत्रों, तबकों और संगठनों से बातचीत करके उनकी शिकायतों और अपेक्षाओं को समझने की कोशिश करेंगे। अच्छी बात यह भी है कि बातचीत का कोई दायरा तय नहीं किया गया है। नए वार्ताकार के नाम का एलान करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हालांकि यह साफ नहीं किया कि बातचीत की प्रक्रिया में हुर्रियत के नुमाइंदों को शामिल किया जाएगा या नहीं, लेकिन यह जरूर कहा है कि दिनेश्वर शर्मा को पूरी आजादी होगी कि वे चाहे जिससे बात करे।

मंत्री टाॅमस चांडी के इस्तीफे की मांग

मुख्यमंत्री भारी दबाव में
पी श्रीकुमारन - 2017-10-30 11:07 UTC
तिरुअनंतपुरमः प्रदेश का राजनैतिक तापमान काफी ऊंचा हो गया है, क्योंकि विपक्ष परिवहन मंत्री टाॅमस चांडी के इस्तीफे पर अड़ गया है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री दबाव से बचने के लिए मामले को टालने की कोशिश कर रहे हैं। टालने के लिए उन्होंने कानूनी सलाह लेने की बात की है।

भाजपा का झाड़ू प्रेम

झाड़ू प्रेम के लिए जनता वोट नहीं देती
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-10-30 11:03 UTC
सत्ता में आए भाजपा नेताओं का झाड़ू प्रेम भी गजब का है। इस प्रेम का ताजा प्रदर्शन एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने किया। पहले ताजमहल पर उनकी पार्टी के लोगों ने एक विवाद खड़ा किया। उनकी पार्टी के एक विधायक ने ताजमहल को ढहा देने की अपील कर दी और कहा कि भारतीय धरोहरों में इसे शामिल नहीं किया जा सकता। उसके पहले योगी की सरकार ने ही पर्यटन स्थल की एक बुकलेट में ताजमहल को शामिल नहीं किया, जबकि ताजमहल भारत में पर्यटकों के आकर्षण का सबसे बड़ा केन्द्र है और साल भर में सबसे ज्यादा देशी और विदेशी पर्यटक वहीं जाते हैं।

उत्तर प्रदेश में सत्ता के अनेक केन्द्र

मुख्यमंत्री की हिन्दुत्व के पोस्टर बाॅय बनने की मजबूरी का राज
प्रदीप कपूर - 2017-10-26 11:30 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था की हालत लगातार खराब होती जा रही है और योगी की सरकार एक सक्षम प्रशासन देने मे विफल हो रही है। अच्छा प्रशासन देने के अपने दायित्व मे विफल योगी आदित्यनाथ ने अपने लिए एक नई भूमिका अपना ली है और वह है हिन्दुत्व के पोस्टर बाॅय में आने की भूमिका। लेकिन इसके कारण प्रदेश की स्थिति लगातार बिगड़ती ही जा रही है।

क्या साथ साथ चुनाव का समय आ गया है?

मोदी के इस एजेंडे के सामने अनेक समस्याएं हैं
कल्याणी शंकर - 2017-10-25 11:49 UTC
लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ करवाने का मसला एक बार फिर सामने आया है। इस बार निर्वाचन आयोग ने कहा है कि वह साथ साथ चुनाव करवाने के लिए तैयार है, बशर्ते कि सभी पार्टियों को इसके लिए तैयार किया जाय। निर्वाचन आयुक्त ओ पी रावत ने कहा है कि निर्वाचन आयोग की हमेशा यह राय रही है कि साथ साथ चुनाव कराने से सरकार के पास नीतियां बनाने और उनपर अमल के लिए पर्याप्त समय रहेगा। इसके कारण बीच बीच में आदर्श चुनाव संहिता के अमल मे आने से होने वाले ठहराव पर रोक लगेगी।

गुजरात चुनाव में मनोवैज्ञानिक युद्ध

पहले दौर में मात खा गई भाजपा
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-10-24 11:16 UTC
कुछ समय पहले तक माना जा रहा था कि गुजरात विधानसभा चुनाव जीतना भारतीय जनता पार्टी के लिए वाएं हाथ का खेल साबित होगा, क्योंकि इसी राज्य के दो नेता पूरे देश भर में भाजपा को जीत दिलवा रहे हैं। लेकिन अब यह धारणा बदल चुकी है। वैसे यह तो नहीं कहा जा सकता कि भाजपा वहां चुनाव हार ही जाएगी, लेकिन यह तो कहा ही जा सकता है कि उसके लिए गुजरात चुनाव जीतना कोई आसान काम नहीं होगा और वहां वह उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के चुनावी नतीजों को दुहरा नहीं पाएगी।

गुरुदासपुर की जीत ने बढ़ाई भाजपा की चिंता

भाजपा के लिए यह चिंतन का वक्त है
प्रभुनाथ शुक्ल - 2017-10-23 11:17 UTC
पंजाब की गुरदासपुर संसदीय उपचुनाव में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली है, जमीनी सच्चाई यह है कि इतनी बड़ी कामयाबी की उम्मीद खुद काँग्रेस और कैप्टन अमरिंदर सिंह की टीम को भी नहीँ रहीं होगी। इस सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत हुई थी। इस पर चार बार सांसद रहे विनोद खन्ना के अप्रैल में निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी। यहाँ से सिने अभिनेता से राजनेता बने खन्ना लगातर जीतते आ रहे थे। लेकिन इस बार भाजपा की पराजय कई सवाल खड़े करती है। गुरुदासपुर में काँग्रेस को मिली बड़ी जीत से पार्टी को एक नई उम्मीद बँधी है। इससे यह साबित हो गया है कि मोदी की सुनामी अब थम रहीं और काँग्रेस बुरे दौर से निकल कर अच्छे दिनों की तरफ कदम बढ़ा रहीं है। अब तक राहुल गाँधी की चुटकी लेनेवाली भाजपा की आँख खुली है।

गरीबी, भूख और स्वास्थ्यः भारतीय बदहाली की यह बुरी तस्वीर

डाॅक्टर अरुण मित्र - 2017-10-21 11:31 UTC
झारखंड के सिमडेगा जिले में एक 11 साल की बच्ची ने भूख से दम तोड़ दिया। इस घटना ने उन्हें भी झकझोर दिया है, जो राज्य के प्रशासनिक शिखर पर हैं। इसने इस तथ्य को भी रेखांकित किया है हमारे देश में भूख की समस्या किस कदर बढ़ी हुई है। इंटरनेशनल फूड पाॅलिसी रिसर्च इंस्टीच्यूट ने ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2017 का प्रकाशन किया है और उसमें भारत 100वें स्थान पर है।

कांग्रेस का राहुल काल

किस आर्थिक माॅडल की पैरवी करेंगे राहुल?
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-10-20 12:19 UTC
सोनिया गांधी द्वारा स्पष्ट किए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि अब कुछ दिनों में ही राहुल गांधी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बैठे दिखाई देंगे। सवाल उठता है कि क्या राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस की नीतियों और खासकर आर्थिक नीतियो में कोई बदलाव आएगा? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है कि आजादी के बाद कांग्रेस की आर्थिक नीतियों के इतिहास को हम दो भागों मे रखकर देखते हैं।

लोक की दिवाली पर बाजार का कब्जा

यह भारतीय दर्शन और जीवन पद्धति के सर्वथा प्रतिकूल है
अनिल जैन - 2017-10-18 10:02 UTC
नोटबंदी और जीएसटी की मार से आम आदमी के कराहने, छोटे और मध्यम कारोबारी तबके का कारोबार ठप होने, किसानों की आत्महत्या का सिलसिला जारी रहने, नौकरियां खत्म होने की वजह से बेरोजगारों की संख्या में इजाफा होने और भुखमरी की वैश्विक स्थिति में भारत का स्थान और नीचे खिसक जाने की दारुण खबरें हमारी तथाकथित मजबूत अर्थव्यवस्था को मुंह चिढा रही हैं। इन्हीं खबरों के बीच देशवासी इस बार दीपावली मना रहे हैं। बाजार की बडी ताकतें, समाज का खाया-अघाया तबका, सामाजिक सरोकारों से पूरी तरह कट कर मुनाफाखोरी की लत का शिकार हो चुका मीडिया और इन सबसे ऊपर सत्तारूढ वर्ग, सब मिलकर माहौल यही बना रहे हैं कि देश में सब कुछ सामान्य है और लोग उत्साह से दिवाली मनाने में मगन है।