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गोरखपुर त्रासदी से भाजपा नेता परेशान

योगी सरकार ने मामले को सही ढंग से नहीं हैंडिल किया
प्रदीप कपूर - 2017-08-24 10:40 UTC
लखनऊः भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकत्र्ता गोरखपुर में हुई त्रासदी के कारण परेशान हैं वह त्रासदी एक मेडिकल काॅलेज अस्पताल में हुई थी, जिसमें आॅक्सीजन की कमी के कारण 60 से भी ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी।

खतौली रेल दुर्घटना: क्या हम बुलेट ट्रेन चलाने के लिए तैयार हैं?

उपेन्द्र प्रसाद - 2017-08-24 03:02 UTC
उत्तर प्रदेश की खतौली में एक भयंकर रेल दुर्घटना हुई, जिसमें कम से कम 23 लोग मारे गए हैं और करीब 100 लोग घायल हुए हैं। घायलों में दर्जनों लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इस दुर्घटना में ट्रेन एक घर और एक स्कूल में घुस गई। इस दुर्घटना के दो दिन के बाद ही उत्तर प्रदेश के ही ओरैया में एक और ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए हैं और घायलों में चार की हालत गंभीर है।

तीन तलाक पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला

मुस्लिम समुदाय को समय के साथ बदलना चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-08-24 02:59 UTC
मुस्लिम सुन्नी समुदाय में तीन तलाक देने के मसले पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। इसके कारण न केवल मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला है, बल्कि मुस्लिम समुदाय को भी एक अमानवीय परंपरा से छुटकारा पाने का मौका मिला है। इसे मुस्लिम समुदाय को सहर्ष स्वीकार कर लेना चाहिए। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने तक तीन तलाक पर रोक लगा दी है और सरकार से कहा है कि इस बीच वह कानून लाकर इसपर पूर्ण पाबंदी का कानूनी प्रबंध करे। यदि यह सरकार कोर्ट द्वारा तय समयसीमा में कानून नहीं लाती है, तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई पाबंदी आगे भी जारी रहेगी।

कांग्रेस का अस्तित्व खतरे में

समाजवादी रुझान और तेज तर्रार नेतृत्व ही इसे बचा सकता है
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2017-08-21 19:18 UTC
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की महिमा सर्वोपरि होती है। जो अपनी अभिव्यक्ति से आमजन को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है, जनमत उसकी ओर खींचा चला जाता है। यहां के बदलते राजनीतिक परिवेश के इतिहास के आईने को साफ - साफ देखा जा सकता है। वर्तमान में राष्टीªय राजनीति पार्टी भाजपा नेतृृत्व में नरेन्द्र मोदी की अभिव्यक्ति में जो तेज , तेवर एवं आकर्षण है वह वर्तमान में राष्टीªय राजनीति पार्टी कांग्रेस नेतृृत्व में कहीं नहीं झलकता। तेज तरार आकर्षण युक्त तेवर कभी राष्टीªय राजनीति पार्टी कांग्रेस में स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी की अभिव्यक्ति में अवश्य झलकता था, जिसकी वजह से श्रीमती गांधी देश की ही नहीं, बल्कि विेश्व स्तर पर अपना प्रभुत्व जमा चुकी थी । वर्तमान में राष्टीªय राजनीति पार्टी कांग्रेस नेतृृत्व में तेज , तरार आकर्षण युक्त तेवर के बजाय भोलापन, निष्पक्ष एवं सरल अभिव्यक्ति का आभास होता है जो वर्तमान राष्टीªय राजनीति में प्रभावहीन साबित हो रहा हैं। विश्व स्तर पर भी तेज , तरार अभिव्यक्ति का प्रभाव देखा जा सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव को इस परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। जहां अभिव्यक्ति का जोर साफ - साफ झलकता है।

गरीबों और वंचितों का इलाज

उन्हें ओझाओं और झाड़फूंक के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए
डाॅक्टर अरुण मित्र - 2017-08-20 10:09 UTC
मध्यप्रदेश सरकार ने ज्योतिषियों और ओझाओं के लिए एक बाह्य चिकित्सा वार्ड खोलने का निर्णय किया है, जिसमें रोगियों को सलाह दी जाएगी। यहां मरीजों की ग्रहदशा वगैरह का अध्ययन किया जाएगा और उसके आधार पर मरीजों को सलाह दी जाएगी ताकि वे अपनी बीमारियों से छुटकारा पा सकें। उनका इलाज उनकी राशि देखकर किया जाएगा। प्रश्न कुंडली टेक्निक का इस्तेमाल करके राशि देखकर बीमारियों का विश्लेषण किया जाएगा।

बिहार का सृजन घोटाला

सीबीआई एक बार फिर कसौटी पर
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-08-20 10:04 UTC
बिहार के भागलपुर जिले के सृजन घोटाले की जांच सीबीआई से कराने का फैसला लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू यादव की मांग स्वीकार कर ली है और अब जांच का जिम्मा जल्द ही केन्द्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया जाएगा। भ्रष्टाचार के मसले पर लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल से अलग होकर भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रकाश में आए सृजन घोटाले के बाद नीतीश सरकार पर सवाल उठाए जा रहे थे। खुद लालू यादव कह रहे थे कि नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता इसीलिए जोड़ा, क्योंकि वे (लालू) इस घोटाले को सामने लाने वाले थे और मुख्यमंत्री खुद इसमे फंसने वाले थे।

गोरखपुर की त्रासदी: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति पर अमल की जरूरत

कल्याणी शंकर - 2017-08-17 12:21 UTC
गोरखपुर के एक अस्पताल में 70 से भी ज्यादा बच्चों की मौत ने देश को हिला कर रख दिया है। इसने केन्द्र और राज्य सरकारों की विफलता को भी एक बार फिर रेखांकित किया है। जिन लोगों ने सरकारें बनाई हैं, उनके स्वास्थ्य के प्रति सरकारें कितना उदासीन हैं, इसका पता भी लगता है। इस तरह की त्रासदी कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि समय समय पर देश के अलग अलग हिस्सों में घटती रहती हैं। भारत एक ऐसा देश है, जहां अस्पतालों में मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं होती है, चाहे वे सरकारी अस्पताल हों या निजी अस्पताल।

शहीदाना अंदाज में शरद यादव की बगावत के निहितार्थ

वे विपक्षी एकता की धुरी बन सकते हैं
अनिल जैन - 2017-08-16 13:11 UTC
लड़-झगड़ कर अलग होना, कुछ समय बाद फिर मिलना-एक होना और अंततरू फिर टूट कर बिखरना! यही नियति रही है भारतीय राजनीति में समाजवादियों की। किसी के लिए भी ठीक-ठीक बता पाना बहुत मुश्किल है कि शानदार वैचारिक विरासत वाली यह वाचाल राजनीतिक जमात कितनी बार टूटी और जुडी तथा आज इसके कितने टुकडे भारतीय राजनीति में विद्यमान हैं। बहरहाल इतिहास फिर अपने को दोहरा रहा है। लगभग दो दशक तक जनता दल (यू) की छतरी तले हमकदम रहे शरद यादव और नीतीश कुमार की राहें अब पूरी तरह जुदा हो गई हैं। उनकी पार्टी के दोफाड होने और एक दूसरे को निकालने की औपचारिकताएं ही अब शेष रह गई हैं।
15 अगस्त स्वाधीनता दिवस विशेष

सरहद की हिफाजत में जिंदगी बनी व्हीलचेयर

प्रभुनाथ शुक्ल - 2017-08-14 11:24 UTC
शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का बाकि यह निशां होगा। यह पंक्तियां सिर्फ दिखावे की हैं। जांबाज जवानों के सम्मान में लिखे गए इस शेर के मायने वक्त के साथ बदल गए हैं। 15 अगस्त यानी स्वाधीनता दिवस पर आसमान से लेकर जमींन तक देशभक्ति उमड़ पड़ती है। भाषणों में जयहिंद और जय जवान, जय किसान का नारा गूंजता है। लेकिन यह भी विडंबना है कि आजादी के 70 सालों में हालात इतने बुरे हो गए हैं कि सराकरों को वंदेमातरम गाने के लिए राजाज्ञा जारी करनी पड़ती है। देशवासियों की यह कैसी देशभक्ति है हम कह नहीं सकते हैं। लेकिन सिर्फ एक दिन के बाद देशभक्ति कहां गुम हो जाएगी पता नहीं चलता। इसके बाद खुद में हम इतने खो जाते हैं कि हमें राष्ट के प्रति खुद के कर्तव्यों और दायित्वों का बोध नहीं रहता है।

नर्मदा पुनर्वास में भ्रष्टाचार

सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन नहीं
एल.एस. हरदेनिया - 2017-08-14 11:21 UTC
दिनांक 3, 4, 5 और 6 अगस्त को नर्मदा के डूब क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान हमें यहां अनेक प्रकार की कठिनाइयां और शिकायतें सुनने को मिलीं। शिकायतों में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें प्रमुख थीं। नर्मदा बचाव आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा भेजी गई अधिकारियों की टीम के बीच हुई बातचीत में भी बार-बार भ्रष्टाचार का उल्लेख किया गया था।