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मर्दवादी सोच का भौंडा प्रदर्शन

केरल के फिल्म उद्योग के इतिहास का भौंडा अध्याय
पी श्रीकुमारन - 2017-07-10 11:30 UTC
तिरुअनंतपुरमः यह मर्दवादी सोच का भौड़ा प्रदर्शन था। मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स संघ के अंदर इस तरह का सोच किस हद तक घुसा हुआ है, उसे केरल की जनता ने देखा और उसे बहुत बड़ा झटका लगा।

लालू का लारा घोटाला

बिहार की राजनीति पर अनिश्चय का साया
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-07-08 17:09 UTC
चारा घोटाले के एक मुकदमे में सजा पाने के बाद जमानत पर चल रहे लालू यादव एक और बड़े घोटाले में फंस रहे हैं। इस घोटाले को हम लारा घोटाला कह सकते हैं, क्योंकि इसमें एक कंपनी शामिल है, जिसका नाम है लारा प्रोपर्टी। लारा लालू और राबड़ी के नाम के पहले दो अक्षरों को मिलाकर बना है। यदि चारा घोटाले की चपेट में लालू अकेले थे, तो इस लारा घोटाले की चपेट में वे, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी भी हैं। उनकी दो बेटियां चंदा और रागिनी का नाम भी लारा प्रोपर्टी के निदेशकों के रूप में सामने आ रहा है। उनकी बड़ी बेटी मीसा यादव पर अलग से आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने घेरा बना रखा है।

चीन से पूरे पूर्वोत्तर को खतरा

भारत के सामने सिक्किम सेक्टर में बड़ी चुनौती
बरुण दास गुप्ता - 2017-07-07 10:40 UTC
पिछले चार-पांच सप्ताह में चीन की तरफ से भारत की सुरक्षा पर बढ़ रहे खतरे साफ दिखाई पड़ रहे हैं। 1962 के बाद से चीनी सैनिकों की गतिविधियां आज सिक्कम सेक्टर में चरम पर हैं। समस्या एक जून को शुरू हुई, जब जन मुक्ति सेना ने डोको ला में सड़क का निर्माण शुरू कर दिया। डोको ला सिक्किम के पास ही है और इसे भारत अपना इलाका मानता है, जबकि चीन इसे अपना इलाका मानता है।

डोकलाम में भारत-चीन तनाव

सुरक्षा के साथ समझौता नहीं
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-07-06 10:39 UTC
भारत और चीन के बीच 1962 के बाद का सबसे बड़ा तनाव आज सिक्किम सेक्टर में पैदा हो गया है। भारत के सिक्क्मि, चीन और भूटान का त्रिवेणी संगम डोकलाम में है और वहां भूटान की सीमा में घुसकर चीन रोड बना रहा था। भारत और भूटान के बीच एक सामरिक समझौता है, जिसके तहत भूटान की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत की है। जाहिर है, भारत भूटान की भूमि में चीनी अतिक्रमण को रोकने के लिए बचनबद्ध है।

क्या विपक्ष मोदी के खिलाफ एक हो पाएगा?

अभी तो लक्षण ठीक नहीं हैं
कल्याणी शंकर - 2017-07-05 10:02 UTC
विपक्षी पार्टियों में यह मान्यता बनती जा रही है कि यदि वे सब एक नहीं हुईं, तो उनका अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। लोकतंत्र में एक प्रभावी विपक्ष का होना बहुत जरूरी है। यही कारण है कि गैर राजग पार्टियां आपस में एकताबद्ध होने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इसके रास्ते में उनके सामने अनके प्रकार की बाधाएं भी आ रही हैं।

विपक्ष में अपनी उपेक्षा से नाराज हैं नीतीश कुमार

राष्ट्रपति चुनाव तो बहाना है
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-07-04 12:40 UTC
नीतीश कुमार अपनी उस आक्रामक मुद्रा में एक बार फिर वापस आ गए हैं, जिस मुद्रा के साथ वह भारतीय जनता पार्टी के अंदर नरेन्द्र मोदी के उभार का विरोध किया करते थे। नरेन्द्र मोदी सामाजिक रूप से एक पिछड़े वर्ग से आते हैं। इस बात को नीतीश कुमार गोधरा बाद हुए दंगे के बाद से ही जानते थे। इसलिए उन्हें यह भी पता था कि यदि नरेन्द्र मोदी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर पहुंचे तो भाजपा के लिए उनकी (नीतीश की) उपयोगिता समाप्त हो जाएगी। भाजपा के अंदर ओबीसी नेतृत्व के अभाव का फायदा उठाकर ही नीतीश छोटे जनाधार के बावजूद बिहार में बड़े जनाधार वाली भाजपा पर हावी रहा करते थे। उन्हें मालूम था कि यदि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व किसी ओबीसी के हाथ में चला जाएगा तो फिर राजग में उनकी उपयोगिता कम हो जाएगी और उसके साथ उनका दबदबा समाप्त हो जाएगा।

जीएसटी का जश्नः संघीय लोकतंत्र पर प्रहार

अनिल सिन्हा - 2017-07-03 12:55 UTC
जीएसटी के जश्न के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेंट्रल हाल से बेहतर जगह नहीं दिखी। जाहिर है मोदी ने यह जगह यूं ही नहीं चुनी। योजना आयोग को खत्म करने के बाद भारत के संघीय लोकतंत्र पर यह दूसरा बड़ा प्रहार है और मोदी इस अवसर को जश्न में तब्दील करना चाहते थे।

मध्यप्रदेश में अल्पसंख्यकों की प्रताड़ना के मामले बढ़े

पाकिस्तान की जीत का उत्सव मनाने वालेे युवक पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा
एल एस हरदेनिया - 2017-07-01 10:32 UTC
भोपालः अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के मामले में मध्यप्रदेश पीछे नहीं है। अनेक मामलों में मुसलमान और ईसाई बहुत ही मामूली आरोपों में गिरफ्तार किए गए हैं। उनमें से कुछ मामले तो काल्पनिक भी हैं। एक वैसे ही मामले में 15 मुस्लिम युवकों पर यह आरोप लगाते हुए राजद्रोह का मुकदमा कर दिया गया है कि वे पाकिस्तान की क्रिकेट मैच में जीत के बाद उत्सव मना रहे थे।

राष्ट्रपति चुनावः दो को छोड़कर सारे चुनाव मतदान से ही हुए

एल.एस. हरदेनिया - 2017-06-30 10:53 UTC
हमारे देश में राष्ट्रपति का चुनाव अनेक अवसरों पर काफी विवादग्रस्त वातावरण में संपन्न हुआ है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राष्ट्रपति पद का पहला चुनाव भी विवादग्रस्त था। वर्ष 1949 के दिनांक 25 नवंबर को हमने अपने संविधान को पारित कर लिया था। उसके बाद 26 जनवरी को हम पूर्ण संप्रभुता प्राप्त लोकतंत्र देश बन गए थे।

महागठबंधन पर महाअसमंजस

आगे की राह आसान नहीं
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-06-29 12:47 UTC
राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के साझा उम्मीदवार को लेकर बिहार के महागठबंधन में चल रही बयानबाजी अब समाप्त हो गई है और लगता है कि राष्ट्रीय जनता दल ने नीतीश कुमार द्वारा राजग उम्मीदवार को समर्थन करने के तथ्य को स्वीकार कर लिया है। लेकिन इसके कारण इस तथाकथित महागठबंधन का महाअसमंजस समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि पहले से और भी ज्यादा बढ़ गया है। नीतीश के दल के महासचिव के सी त्यागी ने, जो पार्टी के आधिकारिक प्रमुख प्रवक्ता भी हैं, यह कहकर महागठबंधन के अपने सहयोगियों को एक और झटका दिया है कि भाजपा के साथ उनके दल का गठबंधन वैचारिक मतभेद के बावजूद ज्यादा सहज था। इसका अर्थ यह है कि उनका दल एक बार फिर भाजपा से हाथ मिला सकता है और वैचारिक मतभेद होने के बावजूद उसके साथ सहज रूप से बिहार की सरकार चला सकता है।