कैशलेस अर्थतंत्र की ओर
आग लगी है, कुंआ खोदें
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2016-12-05 12:36 UTC
पुराने 500 और 1000 रुपये नोटों को रद्द कर दिए जाने के बाद मची अफरातफरी के बीच केन्द्र सरकार अब कैशलेस अर्थतंत्र की वकालत कर रही है। अफरातफरी का माहौल समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है और जितनी रकम के नोटों का रद्द किया है, उतनी रकम के नोट छापने में 6 महीने या उससे भी ज्यादा लग सकते हैं, लेकिन देश तब तक के लिए इंतजार नहीं कर सकता। यदि पर्याप्त नोट छपने का इंतजार किया गया और तबतक इसी तरह की अफरातफरी मची रही, तो देश को भारी नुकसान हो जाएगा। वैसे नुकसान तो अभी भी हो ही रहा है। देश में अभूतपूर्व मुद्रासंकट चल रहा है, क्योंकि बड़े पैमाने पर कैश की कमी हो गई है। हमारे देश में भ्रुगतान के लिए कैश का ही ज्यादातर इस्तेमाल होता रहा है। एक अनुमान के अनुसार देश में 90 फीसदी भुगतान कैश के द्वारा ही होता है और केशलेस भुगतान मात्र 10 प्रतिशत ही होता रहा है।