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भारत

सरकार के दो सत्ता केन्द्र पर बहस

मनमोहन को सोनिया का नेतृत्व क्यों स्वीकार करना पड़ा
कल्याणी शंकर - 2014-04-19 09:28 UTC
इस बात पर बहस कि क्या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक कमजोर प्रधानमंत्री थे और सरकार के अंदर दो सत्ता केन्द्रों के अस्तित्व का होना एक सफल परीक्षण था या विफल अब एक बेमतलब की कसरत रह गई है। सच तो यह है कि 1998 में जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस पर कब्जा किया था, तो उसके बाद से वह लगातार कांग्रेस के अंदर सत्ता की एक अकेली केन्द्र थी। उनका नेतृत्व सिर्फ कांग्रेस द्वारा ही नहीं, बल्कि यूपीए के अंदर के कांग्रेस के सहयोगियों द्वारा भी स्वीकार कर लिया गया था। करुणानिधि को सोनिया गांधी के नेतृत्व से कोई परेशानी नहीं थी। एनसीपी का गठन किया तो गया था सोनिया गांधी का विरोध करते हुए, लेकिन जब यह यूपीए का हिस्सा बना तो इसके अध्यक्ष शरद पवार को सोनिया का नेतृत्व स्वीकार करने में कोई परेशानी नहीं हुई। लालू यादव भी बढ़चढ़कर सोनिया गांधी के नेतृत्व का समर्थन कर रहे थे।
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राजनाथ की राजनीति से उत्तर प्रदेश भाजपा में भ्रम

मुस्लिम नेताओं से सिंह की बैठक ने स्थिति बिगाड़ी
प्रदीप कपूर - 2014-04-17 10:57 UTC
लखनऊः भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश में सबकुछ ठीक चल रहा था। नरेन्द्र मोदी की बड़ी बड़ी चुनावी सभाएं आयोजित की जा रही थी। उनमें लोगों की भीड़ भी काफी उमड़ रही थी। मोदी के भाषणों पर लोग उत्साहित भी दिख रहे थे। लेकिन राजनाथ सिंह की शिया मुस्लिमों के धार्मिक नेता मौलाना कल्बे जावाद के एक बयान में भाजपा के रंग में भंग कर दिया है।
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गुजरात दंगे में नरेन्द्र मोदी की कोई नकारात्मक भूमिका नहीं थीः के पी एस गिल

विशेष संवाददाता - 2014-04-17 03:15 UTC
नई दिल्ली। पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं गुजरात सरकार के पूर्व सुरक्षा सलाहकार के पी एस गिल ने कहा है कि सन् 2002 के गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोई नकारात्मक भूमिका नहीं थी, तथा उन्होंने पहले ही दिन से दंगे रोकने के लिए कोशिश शुरु कर दी थी।
मध्यप्रदेश का चुनावी परिदृश्य

सिंधिया आगे, पर अधिकांश सीटों पर भाजपा को बढ़त

एल एस हरदेनिया - 2014-04-16 11:48 UTC
भोपालः 17 अप्रैल को हो रहे मतदान में जिन महत्वपूर्ण नेताओं के भाग्य निर्धारित होने वाले हैं, उनमें से मुख्य हैं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर और केन्द्रीय मंत्री ज्यातिरादित्य सिंधिया। श्री तोमर ग्वालियर से चुनाव लड़ रहे हैं, तो श्री सिंधिया गुना से।
भारत: लोकसभा चुनाव और बिहार सरकार

नीतीश सरकार का भविष्य अधर में

उपेन्द्र प्रसाद - 2014-04-15 11:47 UTC
लोकसभा का चुनाव तो केन्द्र की सरकार के गठन के लिए होता है, पर इसके नतीजे बिहार की राज्य सरकार के भविष्य को भी निर्धारित करेंगे। बिहार की नीतीश सरकार भाजपा से अलग होने के बाद अल्पमत में है। इसने अपना बहुमत कांग्रेस के चार विधायकों और कुछ निर्दलीय विधायकों की सहायता से साबित किया था।
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तमिलनाडु में भाजपा हो रही है मजबूत

क्षेत्रीय दलों से गंठबधन कोई गुल खिला सकता है
अशोक बी शर्मा - 2014-04-14 12:55 UTC
तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी कभी मजबूत नहीं रही है। इस बार भी कहा जा रहा था कि वहां वह कुछ हासिल नहीं कर पाएगी। पर क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करके भाजपा ने वहां अपनी स्थिति सुधार ली है। गठबंधन के तहत उसे 8 सीटों पर चुनाव लड़ना था। उसके उम्मीदवारों ने आठों सीटों पर नामांकन भी दाखिल किया था, लेकिन एक सीट पर वह रद्द घोषित हो गया। इसके कारण अब उसके 7 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। इन सात सीटों में से 4 पर भाजपा जीत की उम्मीद कर सकती है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण

सपा और भाजपा सफलता के प्रति आशान्वित
प्रदीप कपूर - 2014-04-13 10:52 UTC
लखनऊः पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रहे सांप्रदायिक घ्रुवीकरण और उसके कारण हुआ रिकार्ड मतदान भाजपा और सपा नेताओं के नेताओं को नया विश्वास दे रहा है।
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चुनावी घोषणापत्र की प्रासंगिकता

पार्टियों को अपने चुनावी वायदों के प्रति जिम्मेदार बनाया जाए
कल्याणी शंकर - 2014-04-13 10:47 UTC
चुनावी घोषणा पत्रों को लेकर तीखी बहस चल रही है। इसकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा हो रही है। खासकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस इसको लेकर कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हैं। दोनों ने अपने चुनाव घोषणापत्र जारी कर दिए हैं। कांग्रेस ने इसे पहले जारी किया था और भारतीय जनता पार्टी ने इसमें देर कर दी। घोषणापत्र जारी करने वाली वह शायद सबसे अंतिम पार्टी है। जिस दिन पहले चरण का मतदान हो रहा था, उसी दिन भारतीय जनता पार्टी ने इसे जारी किया।
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तिकोने मुकाबले में भाजपा बिहार में आगे

नीतीश के लिए यह चुनाव निर्णायक
उपेन्द्र प्रसाद - 2014-04-10 16:41 UTC
पटनाः बिहार में हो रहे लोकसभा चुनाव में मुकाबला तिकोना हो गया है। इस तिकोने मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी अपने अन्य प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पड़ रही है। वह 30 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि उसके समर्थन से रामविलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी के 7 उम्मीदवार और उपेन्द्र कुशवाहा की लोकतांत्रिक राष्ट्रीय समता पार्टी के 3 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। भाजपा समर्थक उम्मीदवारों में से ज्यादा की स्थिति अच्छी नहीं है। उपेन्द्र कुशवाहा खुद मुख्य मुकाबले से बाहर हो चुके हैं। उनकी पार्टी के सीतामढ़ी उम्मीदवार भी मुख्य मुकाबले से बाहर हो चुके हैं। रामविलास पासवान, उनके भाई रामचंद्र पासवान और बेटे चिराग पासवान की स्थिति भी कुछ खास ठीक नहीं हैं।
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मोदी अंततः कट्टरवादी हिंदुत्व को ही चुनेंगे

अमितशाह ने अपना सही रूप दिखाया
अमूल्य गांगुली - 2014-04-10 01:48 UTC
जब से नरेन्द्र मोदी को यह अहसास हुआ कि उनका क्रिया और प्रतिक्रिया वाला सिद्धांत गुजरात से बाहर उनके लिए कामगार नहीं होगा, उन्होंने अपना एक नया चेहरा दिखाना शुरू कर दिया। वह नया चेहरा था उदारतावाद का। उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की वे मुसलमानों के प्रति नरम रवैया रखते हैं। यह दिखाने के लिए उन्होंने सदभावना अभियान चलाया, जिसके तहत उन्होंने उपवास रखे और सद्भावना सभाओं का आयोजन किया। उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि मुसलमान भी उन्हें बहुत चाहते हैं।