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अगले विधानसभा चुनाव में डीएमके की बहुमत पाने की कोशिश

करुणानिधि और ममता के कारण केन्द्र सरकार रहेगी परेशान
एस सेतुरमण - 2010-03-02 11:05 UTC
केन्द्र सरकार बजट पेश करने के बाद विपक्ष के अलावा ममता बनर्जी की पार्टी और डीएमके के असंतोष का सामना कर रही है। ममता बनर्जी को 2011 के चुनाव में वामपंथियों को पराजित कर सत्ता हासिल करनी है, तो उसी साल तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में करुणानिधि को अपनी पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता हासिल करनी है। जाहिर है दोनों पार्टियां केन्द्र सरकार को वे कदम उठाने नहीं देना चाह्रेगी, जिनसे लोगों को परेशानी होती हो और जिन्हें मुद्दा बनाकर उनके प्रतिद्वंद्वी उनपर हावी होना चाहते हैं।

भारत: दादा के बजट से महंगाई को पंख

इसे पास कराने के लिए रॉलबैक का सहारा लेना होगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2010-02-27 17:58 UTC
दीदी के रेल बजट में यात्रियों को बढ़ी सुविधाओं की भरमार थी और किराया न बढ़ने से भी लोगों में खुशी थी। क्षेत्रीय कारणों से कहीं कहीं नाराजगी जरूर थी, लेकिन कुल मिलाकर उसका स्वागत ही किया जा रहा था। पर दो दिन के बाद दादा के आम बजट ने तो लोगों को नानी याद दिला दी है।
भारत

बजट से टूटा आम आदमी की मंहगाई कम होने के सपने

जेवरात मंहगी होने से गरीब दूल्हनियों के दिल को पंहुचेगी ठेस
एस एन वर्मा - 2010-02-26 13:14 UTC
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा आज संसद में पेश किए गए बजट ने आम आदमी के उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सोना और चांदी मंहगा होने की खबर ने तो शादी रचाने वाली गरीब दुल्हनियों के दिल को तोड़ दिया है। बजट में मंहगाई से राहत मिलने के उपाए किए जाने की बाट जोह रहे लोग हताश हैं।
भारत

माओवादियों के साथ बातचीत की पेशकश

सर्वसमावेशी विकास ही समस्या का निदान है
कल्याणी शंकर - 2010-02-26 11:41 UTC
क्या माओवादियों और सरकार के बीच कोई समझौता हो पाएगा? क्या दोनों के बीच बातचीत हो भी पाएगी? यदि ऐसा होता है तो यह बहुत ही अच्छा होगा, क्योंकि टकराव के कारण भारी हिंसा की आशंका है और सदि हम हिंसा से बचें तो इससे अच्छा और क्या हो सकता है?

भारत: आम बजट 2010-11 में खाद्य सुरक्षा और न्यायपूर्ण आर्थिक विकास हासिल करने के उद्देश्य का दावा

विशेष संवाददाता - 2010-02-26 08:40 UTC
नई दिल्ली: आज लोकसभा में पेश किए गए वर्ष 2010-11 के आम बजट में वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी ने अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज करने और आम आदमी को न्याय दिलाने के उद्देश्य से कई उपायों का प्रस्ताव किया। हर चुनौती से वाकिफ वित्त मंत्री ने बताया कि आज भारतीय अर्थव्यवस्था एक वर्ष पहले की स्थिति के मुकाबले बहुत बेहतर स्थिति में है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आज चुनौतियां नहीं हैं।

भारतीय सीमा पर बेहतर चौकसी हेतु बाड़ और तीव्र प्रकाश की व्यवस्था

रविन्दर सिंह - 2010-02-26 05:49 UTC
पड़ोसी देशों के साथ भारत की सीमायें काफी छिद्रिल यानी भेद्य (पोरस) हैं। सीमा के दोनों और भौगोलिक, प्रजातीय और सांस्कृतिक समानताओं के साथ-साथ भारतीय क्षेत्र में बेहतर आर्थिक अवसरों के कारण निहित स्वार्थी लोगों के लिये अवैध रूप से सीमा पार कर इस ओर आना हमेशा से आकर्षण का विषय रहा है। इन्हीं कारणों के चलते घुसपैठ, तस्करी और सीमाओं के उल्लंघन की घटनाएं, जब तब सुनने में आती रहती हैं। इन असामाजिक तत्वों से सीमा की सुरक्षा के लिये सरकार ने बहुकोणीय रास्ता अपनाया है। बाड़ लगाना और तेज रोशनी करना सीमा पर चौकसी बनाए रखने की व्यवस्था के प्रमुख घटक हैं।
भारत

कृषि में निवेश को बढा़ने तथा सक्षम खाद्य प्रबंधन पर नए सिरे से ध्यान देने की जरूरत - आर्थिक समीक्ष

विशेष संवाददाता - 2010-02-25 13:14 UTC
नई दिल्ली: आज संसद में पेश आर्थिक समीक्षा 2009-10 में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में व्याप्त चुनौतियों का समाधान व्यापक तथा समन्वित प्रयासों से किए जाने की आवश्यकता है । कृषि उत्पादन तथा उत्पादकता में सुधार , कृषि निविष्टियों का बेहतर उपयोग, उपयुक्त विपणन बुनियादी ढांचा तथा सहयोग, पर्यावरणीय चिंताओं पर यथोचित जोर देकर कृषि में निवेश को बढा़ने तथा सक्षम खाद्य प्रबंधन पर नए सिरे से ध्यान देने की जरूरत है ।

वैश्विक आर्थिक मंदी से उबरी भारतीय अर्थव्यवस्था 9 प्रतिशत विकास दर की ओर अग्रसर

विशेष संवाददाता - 2010-02-25 11:00 UTC
नई दिल्ली: आज संसद में पेश आर्थिक समीक्षा 2009-10 के अनुसार अर्थव्यवस्था वैश्विक आर्थिक मंदी से उबर रही है और यह 9 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने की ओर अग्रसर है।
भारत

आर्थिक समीक्षा 2009-10 की विशेषताएं - एक झलक

विशेष संवाददाता - 2010-02-25 10:55 UTC
नई दिल्ली: संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार का दावा किया गया है। कहा गया कि वर्ष 2008-09 में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर की अपेक्षा वर्ष 2009-10 में वृद्धि दर 7.2 रहने की आशा है।


भारत

ममता की रेल बजट: वर्तमान ही नहीं, भविष्य पर भी नजर

उपेन्द्र प्रसाद - 2010-02-25 10:47 UTC
ममता बनर्जी द्वारा पेश किए गए दूसरे बजट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पहली बार किसर रेलमंत्री ने रेल के संशाधनों को राष्ट्रीय संसाधन मानते हुए उनका इस्तेमाल सिर्फ लोगों को यात्रा करवाने और माल की ढुलाई तक ही सीमित नहीं रखा है, बल्कि देश के अन्य सेक्टरों के विकास के लिए भी समर्पित कर दिया है। ऐसा करते समय उन्होंने यह घ्यान रखा है कि रेल की संपत्ति निजी हाथों में नहीं जाए बल्कि निजी क्षेत्र रेल के साथ भागीदारी कर परियोजनाओं को आगे बढ़ाए और पूंजी लगाकर मुनाफे में भागीदारी करे।