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भारतीय न्यायालयों में भ्रष्टाचार

फिर न्यायाधीश ने सुनवाई छोडी

भविष्य निधि घोटाले में एक और नया मोड़
ज्ञान पाठक - 2008-08-08 07:52 UTC
नई दिल्ली: लगभग 23 करोड़ रुपये के भविष्य निधि घोटाले की सुनवाई करने के मामले में पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के जी बालाकृष्णन ने स्वयं को अलग कर लिया था, और अब दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी एन अग्रवाल ने भी वैसा ही किया। अब किसी अन्य पीठ को इसकी सुनवाई करनी पड़ेगी जिसपर घोटाले के अभियुक्त न्यायाधीशों को बचाने का आरोप न हो या न लग पाये।
सबसे भ्रष्ट और निकम्मी सरकार

मनमोहन सिंह की छवि पर बट्टा

किसके संरक्षण में हैं बेअंकुश मंत्री और अधिकारी
विष्णुगुप्त - 2008-04-30 17:20 UTC
इस समय केन्द्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेतृत्व वाली और वामपंथियों द्वारा समर्थित संप्रग सरकार अब तक की सबसे भ्रष्ट, निक्कमी, विफल और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय नीति निर्धारण में भी दिशाहीन सरकार है। मनमोहन सिंह की कैबिनेट में एक से बढ़कर एक भ्रष्ट और आपराधिक छवि वाले मंत्री हैं। उन पर न तो मनमोहन सिंह का नियंत्रण है और न ही सत्ता की असली केन्द्र सोनिया गांधी का।
भारतीय क्रिकेट की दुर्दशा पर पूरा देश हैरान

देख तमाशा क्रिकेट का

हरभजन दोषी है और भारतीय क्रिकेट बोर्ड तथा टीमों को खरीदने वाले कारपोरेट घराने भी
विष्णु गुप्त - 2008-04-28 04:38 UTC
भद्रजनों का खेल माने जने वाले क्रिकेट को नौटंकी का तमाशा बना दिया गया है। पैसा कमाना एकमेव लक्ष्य बना लिया गया है। आखिर क्यों राजनीतिज्ञ, व्यापारी और नौकरशाह क्रिकेट का भाग्यविधाता बने हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर भी क्रिकेट प्रेमियों को चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय ने रोकी दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई

न्यायालय, न्याय और नांदीग्राम

लेकिन जारी रहेगी सीबीआई की कार्यवाही, गोली चालन ‘अनुचित’ की टिप्पणी हटाने से इनकार
ज्ञान पाठक - 2007-12-13 13:26 UTC
माननीय सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति बैठते हैं और उनके पास, हम मानकर चलते हैं कि ज्यादा विवेक है। हो सकता है कि सीबीआई को पश्चिम बंगाल पुलिस के दोषी अधिकारियों और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामले शुरु करने से रोकने के पीछे भी कोई राज हो और वह राज भी मानवता के उच्च मानदंड के अनुकूल हो। लेकिन ऐसा निर्णय अद्भुत है और कई कारणों से अद्भुत।
संप्रग सरकार के कपटी आश्वासनों पर भरोसा नहीं

संसद में छल बल और बेवसी

भारतीय विपक्ष भी आशंकित और सत्तापक्ष के सहयोगी गठबंधन साथी भी
ज्ञान पाठक - 2007-12-06 11:50 UTC
कल राज्य सभा में भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत अमेरिकी नाभिकीय समझौते के लागू होने के बाद सरकार सदन की भावना का ख्याल रखेगी। आखिर ऐसा करने का राज क्या है और उनकी बातों पर क्या सोचा जाना चाहिए?
कांग्रेस में चापलूसी और निकम्मेपन का घुन

राहुल का नुस्खा और इलाज

नब्ज पकड़ी पर नीयत ठीक हो तो बात बने
ज्ञान पाठक - 2007-11-22 16:26 UTC
काग्रेस की बीमारी क्या है? संगठन में क्या - क्या परिवर्तन करने की आवश्यकता है? पार्टी को जीवंत कैसे बनाया जाये?... आदि - आदि। ऐसे सवाल नये नहीं हैं। नया है तो यह कि अब राहुल गांधी को मैदान में उतारा गया है और उन्होंने कुछ बातें भी कहीं, नुस्खा भी बताया। लेकिन...
राहुल ने पकड़ी यूपी कांग्रेस की असल बीमारी

लेकिन इलाज का सवाल

मुर्दा हो चुकी कांग्रेस क्या जिंदा भी हो सकेगी
हिसाम सिद्दीकी - 2007-11-21 12:57 UTC
आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी राहुल गांधी उत्तर प्रदेश कांग्रेस की असल बीमारी समझ चुके है। यह अंदाजा उन्हीं की बातों से पिछले दिनो लखनऊ में उस वक्त लगा जब वह मीडिया से मुखातिब हुए। पार्टी का मर्ज जानकर उन्होंने यह तो जाहिर कर दिया कि वह एक सियासी डाक्टर बन चुके है, लेंकिन अस्ल सवाल यह है कि क्या वह इतने माहिर हैं।
अप्रत्याशित विदेशी धनागम से भारत को खतरा

भोजन की घटती उपलब्धता

वित्त मंत्री को ऐसे आर्थिक विकास पर गर्व
ज्ञान पाठक - 2007-11-12 18:53 UTC
भारत के वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने देश के आर्थिक विकास की एक तस्वीर पेश करते हुए देश के आर्थिक संपादकों के एक सम्मेलन में कहा कि उन्हें और उनकी सरकार को गर्व है। उन्होंने कहा कि ऐसा गर्व क्षमा योग्य है। लेकिन क्या भारत की जनता उन्हें क्षमा कर सकेगी विशेषकर वे जिनके लिए भोजन की उपलब्धता घटी है? उन्होंने देश की विकास दर सकल घरेलू उत्पाद का 9.4 प्रतिशत बताया लेकिन यह भी स्वीकार किया कि प्रति व्यक्ति भोजन की उपलब्धता कम होती जा रही है। सवाल है कि ऐसे विकास का हमारी आम जनता क्या करेगी?

ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

यह धोखा है कामरेड

जनविरोधी नीतियों के साथ भी और विरोध में भी !
System Administrator - 2007-11-11 06:41 UTC
सोचने के लिए मजबूर करने वाली बात यह है कि केन्द्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की जो सरकार चल रही है वह तो वामपंथी राजनीतिक पार्टियों के समर्थन पर ही चल रही है। यदि वामपंथी राजनीतिक पार्टियों को यह ज्ञान है कि सरकार की नीतियां “जन विरोधी और श्रमिक विरोधी” हैं तो वे ऐसी सरकार को समर्थन ही क्यों दे रहे हैं।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

विशेष आर्थिक क्षेत्र की नयी यो

सरकार की अधिनायकवादी प्रवृत्ति और चीखते-चिल्लाते लोग
System Administrator - 2007-11-11 06:20 UTC
मामला काफी गंभीर है और सरकार की प्रियोक्ति अलंकार वाली भाषा पर भरोसा करना ऐसे समय में उचित नहीं होगा। उद्योग और कृषि दोनों क्षेत्रों को अधिकांश लोगों को नुकसान से बचाने का इंतजाम और आगे की विकास की योजनाएं साथ-साथ चलनी चाहिए, एक दूसरे की कीमत पर नहीं। विकृति लाने के अथक प्रयासों के मुकाबले अथक विरोध ही एक रास्ता बचा है तथा चिकनी चुपड़ी बातों में आकर खूंटा वहीं नहीं गड़ने देना चाहिए जहां सरकार चाहती है। पहले चीखते-चिल्लाते लोगों के दुख जरुर सुन लें