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अमर वारुणी

हठ योग में अमर वारुणी उस अमृत रस को माना जाता है जिसे पी लेने के बाद योगी अमर हो जाता है।

इसे पी पाना खेचरीमुद्रा में ही सम्भव माना जाता है। हठ योगियों का विश्वास है कि यह अमृत रस या जल चन्द्रमा से झरता है।

अमरवारुणी को पीने वाले योगी को सच्चा कुलीन अर्थात् कौल माना गया है।

संतों ने इसी अमरवारुणी को दिव्य मद्य, सुरा या सोमरस कहा है जिसे पीकर योगी मस्त रहता है।

संत कबीर ने तो इसको पीकर आठो पहर मस्त रहने की बात कही जिसे वे कई स्थानों पर राम रसायन भी कहते हैं।


Page last modified on Friday January 10, 2014 17:49:48 GMT-0000