अमृतगति साहित्य में अमृतगति एक छन्द है। इसे त्वरितगति भी कहा जाता है। उदाहरण के रुप में केशवदास की एक कविता देखें - निज पति पंथहिं चलिये। दुख-सुख का दलु दलिये। तन-मन सेवहु पति को। तब लहिये सुख गति को।