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आंगन

घर के आगे का स्थान या बीच का स्थान जिसके चारों ओर कमरे हों उसे आंगन कहा जाता है।

दर्शनशास्त्र में आंगन का भिन्न अर्थों में प्रयोग किया गया है।

संत कबीर ने आंगन का प्रयोग मानव के अन्तःकरण के रूप में किया है तथा वे इसे झाड़ू से साफ करने की बात करते हैं।

सिद्ध परम्परा के चर्यापद में इसे उष्णीय कमल के अर्थ में प्रयुक्त किया गया है।


Page last modified on Monday February 17, 2014 06:40:41 GMT-0000