आंध्र प्रदेश
आंध्र के संबंध में प्रारंभिक उल्लेख ऐतरेय ब्राह्मण में (2000 ईसा पूर्व) मिलता है। इसमें संकेत दिए गए हैं कि आंध्र मूल रूप से आर्य जाति के थे और उत्तर भारत में रहते थे, जहां से वे विंध्य पर्वतों के दक्षिण में चले गए और बाद में अनार्यों के साथ घुल-मिल गए। इतिहासविदों के अनुसार आंध्र प्रदेश का नियमित इतिहास 236 ईसा पूर्व से शुरू होता है। इसी वर्ष सम्राट अशोक का निधन हुआ था। उसके बाद की शताब्दियों में सातवाहनों, शकों, इक्ष्वाकुओं, पूर्वी चालुक्यों और काकातीयों ने इस तेलुगु देश पर शासन किया। बाद में विजयनगर और कुतुबशाही शासकों का शासन रहा और उनके बाद मीर कमरूद्दीन और निज़ाम के नाम से प्रसिद्ध उसके उत्तराधिकारियों ने आंध्र पर शासन किया। धीरे-धीरे 17वीं शताब्दी से अंग्रेजों ने निज़ाम के कई हिस्सों पर नियंत्रण कर लिया और मद्रास प्रान्त की स्थापना की।स्वतंत्रता के बाद तेलुगु भाषी क्षेत्रों को मद्रास प्रेसीडेंसी से अलग कर 1 अक्तूबर, 1953 को नए आंध्र प्रदेश राज्य का गठन किया गया। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 पारित होने के बाद हैदराबाद राज्य का आंध्र प्रदेश में विलय हो गया और परिणामस्वरूप 1 नवंबर, 1956 को आंध्र प्रदेश राज्य अस्तित्व में आया।
आंध्र प्रदेश के उत्तर में ओडिशा और छत्तीसगढ़ हैं, पश्चिम में महाराष्टू और कर्नाटक, दक्षिण में तमिलनाडु तथा पूर्व में 974 किलोमीटर की तटरेखा वाली बंगाल की खाड़ी है।
कृषि
आंध्र प्रदेश की आबादी के करीब 62 प्रतिशत हिस्से का मुख्य व्यवसाय खेती है। चावल राज्य की प्रमुख फसल और मुख्य आहार है तथा राज्य के कुल अनाज उत्पादन में चावल का हिस्सा 77 प्रतिशत है। अन्य प्रमुख फसलें हैं- ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी, दालें, तंबाकू, कपास और गन्ना। राज्य के कुल क्षेत्रफल के 23 प्रतिशत हिस्से में वन हैं। महत्वपूर्ण वन उत्पादों में सागौन, यूकलिप्टस, काजू, कैस्यूरीना और इमारती लकड़ी शामिल हैं।
सरकार न्यूनतम लागत तथा अधिकतम आय के लिए व्यावहारिक कृषि उत्पादन के मिशन पर काम कर रही है। मिशन को वास्तविक रूप देने के लिए सरकार अनेक योजनाएं, जैसे नौ घंटे की विद्युत आपूर्ति, सब्सिडी वाले बीज, सब्सिडी पर फसल ऋण उपलब्ध कराने जैसी बेहतर कृषि योजनाएं लागू कर रही है। आंध्र प्रदेश का सहकारी तथा व्यावसायिक बैंकों द्वारा कृषि ऋण उपलब्ध कराने में पहला स्थान है।
केंद्र सरकार की ऋण माफी योजना तथा राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजना से लगभग एक करोड़ किसानों को 16,000 करोड़ रुपए का फायदा हुआ। आंध्र प्रदेश सरकार खाद्य उत्पाद बढ़ाने के लिए सहकारी कृषि पद्धति शुरू करने में रूचि ले रही है।
सिंचाई
जलयागणम कार्यक्रम के तहत कुल 86 परियोजनाओं को शामिल किया गया है, जिसमें से 44 बड़ी, 30 मझौली, 4 बांधों के तटबंध तथा 8 आधुनिकीकरण की परियोजनाएं हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सभी संभव स्रोतों से धन प्राप्त कर सभी चालू तथा नई परियोजनाओं को रिकार्ड समय में पूरा करना है, जिसमें पानी की कमी वाले सभी क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने को उच्च प्राथमिकता दी गई है।
बिजली
राज्य की महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाएं हैं- नागार्जुन सागर और नीलम संजीव रेड्डी सागर (श्रीसेलम पनबिजली परियोजना), ऊपरी सिलेरू, निचले सिलेरू, तुंगभद्रा पनबिजली परियोजना और नेल्लोर, रामगुंडम, कोठगुंडम, विजयवाड़ा और मड्डानूर तापबिजली परियोजना। 770 मेगावाट स्थापित क्षमता वाली श्रीसेलम (दायां तट) पनबिजली परियोजना, 900 मेगावाट क्षमता की श्रीसेलम (बायां तट) पनबिजली परियोजना और 960 मेगावाट क्षमता वाली नागार्जुन सागर परियोजना राज्य में पनबिजली के प्रमुख स्रोत हैं। 1,260 मेगावाट क्षमता वाला विजयवाड़ा ताप बिजलीघर तथा 1,200 मेगावाट क्षमता वाला कोठगुंडम ताप बिजलीघर ताप बिजली के प्रमुख स्रोत हैं। 1000 मेगावाट क्षमता वाले कोयले पर आधारित सिंहाद्रि ताप बिजलीघर का उद्देश्य उत्पादित समस्त बिजली आंध्र प्रदेश आपूर्ति करना है।
उद्योग
आंध्र प्रदेश सरकार उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में नई नीतियां तैयार कर तथा संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाकर, बेहतर औद्योगिक वातावरण करवा कर, क्षमता प्रोत्साहन में वृद्धि, आयातकों को बेहतर विपणन सुविधा उपलब्ध करवा कर आयात को प्रोत्साहन देकर घरेलू तथा विदेशी निवेश को बढ़ावा दे रही है। यह महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे भेषज, जैव-प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, रसायन, चमड़ा, वस्त्र उद्योग, संसोधित घटकों, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रानिक्स एवं सेमी कंडक्टर तथा ऑटोमोबाइल एवं आटो कल-पुर्जों के विकास पर मुख्य जोर दे रही है। औद्योगिक वृद्धि को तेज करने के लिए सरकार क्षेत्र आधारित औद्योगिक ढांचों, जैसे बायोटेक पार्क, टेक्सटाइल पार्क, लेदर पार्क, आटो पार्क, फैबसिटी तथा हार्डवेयर पार्क का निर्माण कर रही है। राज्य सरकार लघु उद्योग, मझौले, छोटे तथा बड़े उद्योगों को विविध प्रोत्साहन दे रही है। राज्य सरकार निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए सेज में विद्युत शुल्क, भूमि आवंटन में रियायत देकर तथा श्रम कानूनों को उदार बना रही है। आंध्र प्रदेश 102 सेज को प्रोत्साहन दे रहा है, जिसमें से 64 राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित हैं। राज्य ने केंद्र सरकार से सक्रिय निजी भागीदारी द्वारा 59 आईटी/आईटीईएस सेज खोलने की सिफारिश की है।
खान एवं भू-विज्ञान
आंध्र प्रदेश पूरे विश्व में चट्टानी तथा खनिज विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इसे 'रत्नगर्भा' कहा जाता है। राज्य में क्राइसोलाइट एसबेस्टस का सबसे बड़ा भंडार है। राज्य के अन्य महत्वपूर्ण खनिज तांबा, मैगनीज, माइका, कोयला तथा चूना पत्थर हैं। सिंगरेनी कोयला खदान से पूरे दक्षिण भारत में कोयले की आपूर्ति होती है। विभिन्न उद्योगों तथा खनिज आधारित निर्माण उद्योगों को प्रोत्साहन देने से खनिजों की खपत बढ़ रही है। राज्य 100-110 मिलियन टन औद्योगिक खनिज तथा 200 मिलियन घनमीटर पत्थर और भवन निर्माण सामग्री का उत्पादन करता है। देश में बैरिट्स तथा चूना पत्थर उत्पादन में राज्य पहले नंबर पर है। राज्य लघु खनिज उत्पादों से राजस्व अर्जित करने में प्रथम स्थान पर तथा सकल खनिज पदार्थों से राजस्व अर्जित करने में देश का दूसरा राज्य है। देश के खनिज उत्पादक राज्यों में खनिज राजस्व अर्जन में इसका प्रथम स्थान है।
आवास
सरकार ने राज्य के मध्यवर्गीय लोगों के एक अद्वितीय स्ववित्तपोषित आवास योजना 'राजीव स्वगृह' शुरू की है। इसका उद्देश्य गृहविहीन मध्यवर्गीय परिवारों को राज्य में शहरी/म्युनिसिपल क्षेत्र में बाजार दर से 25 प्रतिशत कम दरों पर आवास उपलब्ध करवाना है। इस योजना के तहत आवास निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
स्वास्थ्य
'राजीव आरोग्यश्री' आंध्र प्रदेश में चल रही एक अद्वितीय स्वास्थ्य बीमा योजना है। इस योजना के तहत गंभीर रोग से पीडित गरीब के लिए दो लाख रुपए तक की उपचार सुविधा का प्रावधान है। सभी सफेद कार्डधारी 344 कॉरपोरेट, निजी तथा सरकारी अस्पतालों में 942 बीमारियों का निशुल्क उपचार करवा सकते हैं। मरीज अपनी मर्जी से अस्पताल चुन सकता है। किसी भी तरह के फ्राड दुरूपयोग को रोकने के लिए पूरी प्रक्रिया आनलाइन वेब आधारित है। यह योजना ज्यादा से ज्यादा सरकारी अस्पतालों को इससे जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, उपलब्ध राजस्व का उपयोग स्वास्थ सुविधाएं बढ़ाने में किया जाएगा। इसके कारण स्वास्थ क्षेत्र का सुधार होगा। अनेक दूसरे राज्यों के अधिकारियों ने राज्य का दौरा कर योजना की सराहना की है।
सूचना प्रौद्योगिकी
सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अवसरों का लाभ उठाने के मामले में यह अन्य राज्यों से बहुत आगे है।
परिवहन सड़कें
31 मार्च, 2009 तक राज्य में सड़कों की लंबाई 69,051 कि.मी. थी जिसमें राज्य से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 4648 कि.मी. राज्य राजमार्ग 10,519 किमी, मुख्य जिला सड़कें 32170 किमी. तथा ग्रामीण सड़के 27,714 कि.मी. थीं। राज्य में आर एंड बी सड़क नेटवर्क के संदर्भ के तहत घनत्व 0.23 किमी प्रति वर्ग किमी तथा तथा 0.86 किमी. प्रति 1000 व्यक्ति था।
रेलवे
राज्य के 5,107 किमी. रेल मार्ग में से 4.633 किमी. बड़ी लाइन के, 473 किमी छोटी लाइन के तथा 37 किमी नेरोगेज के हैं।
उड्डयन
शमसाबाद, तिरूपति तथा विशाखापट्टनम महत्वपूर्ण हवाई अड्डे हैं। शमसाबाद से अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवा उपलब्ध है।
बंदरगाह
केंद्र सरकार का मुख्य बंदरगाह विशाखापट्टनम तथा राज्य सरकार के 13 छोटे बंदरगाह राज्य में स्थित हैं। समुद्री गतिविधियों जैसे अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग, तटीय शिपिंग, पोत मरम्मत, मछली पकड़ने, पर्यटन तथा खेलों आदि के लिए बंदरगाह महत्वपूर्ण विकास की क्षमता रखते हैं।
पर्यटन स्थल
हैदराबाद में चारमीनार, सालारजंग संग्रहालय और गोलकुंडा किला, वारंगल में सहस्त्र स्तंभ मंदिर और किला, यादागिरिगुट्टा में श्रीलक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर, नागार्जुनकोंडा और नागार्जुन सागर में बौद्धस्तूप, तिरूमाला-तिरूपति में श्री वेंकटेश्वर मंदिर, श्रीसेलम का श्रीमल्लिकार्जुनस्वामी मंदिर, विजयवाड़ा का कनक दुर्गा मंदिर, अन्नावरम में श्रीसत्यनारायण स्वामी मंदिर, सिंहाचलम में श्री वराह नरसिंह स्वामी मंदिर, भद्राचलम में श्री सीताराम मंदिर, अरकुघाटी, होर्सले पहाडि़यां और नेलापट्टू आदि आंध्र प्रदेश के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं।