आकाश द्रव्य रूप, रस, गन्ध तथा स्पर्श गुण जिसमें नहीं है वह आकाश है। आकाश का शब्द ही गुण है। इसमें समस्त जगत अन्तर्विष्ट या समाया हुआ है।