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आगतपतिका

आगतपतिका नायिका का एक भेद है। इसी को कृपाराम ने स्वागतपतिका भी कहा है। सूरदास तथा रहीम आगतपतिका ही कहते हैं।

मतिराम ने इसकी परिभाषा देते हुए कहा कि जब नायिका का प्रेमी (पति) विदेश से घर लौट आता है तब उस समय नायिका की जो अवस्था होती है उसे आगतपतिका कहते हैं। परन्तु पद्माकर ने कहा कि वह अवस्था स्वाभाविक हर्ष की अवस्था ही होनी चाहिए। अर्थात् आगतपतिका प्रेमी के लौटने पर एक उल्लसित और हर्षित नायिका है।


Page last modified on Thursday February 20, 2014 07:20:24 GMT-0000