कथानक
किसी भी कथा का अत्यंत संक्षिप्त रूप कथानक कहलाता है। इसमें सम्पूर्ण कथा का कालक्रम और उसकी तारतम्यता भी शामिल रहती है।किसी भी पाश्चात्य कथानक में, विशेषकर नाटक मे, पारम्परिक रूप से पांच स्थितियां क्रम से होती हैं।
ये हैं - आरम्भ, कार्य-विकास, चरम-सीमा, निगति तथा समाप्ति।
परन्तु आधुनिक काल में इस पारम्परिक अवधारणा से इतर भी कथानक मिलते हैं।
भारतीय परम्परा में ये अवस्थाएं हैं - आरम्भ, प्रयत्न, प्राप्त्याशा, नियताप्ति तथा फलागम।