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कौलाचार

कौलाचार तंत्र साधना का एक भेद है। कहा जाता है कि कौलाचार साधना करने वाले साधक को यह साधना शिव बना देती है।

यह भी कहा जाता है कि कौलाचार में सभी प्रकार के आचार अन्तर्निहित होते हैं। इस साधक के लिए सारे बन्धन, सारे विधि-निषेध समाप्त हो जाते हैं।

कौलाचार साधक को कौल कहते हैं। कौल स्वयं अपने गुरु होते हैं तथा वही सदाशिव भी होते हैं। उसके लिए उससे बड़ा फिर कोई नहीं होता। यह अलग बात है कि कौलाचारी भी तीन प्रकार के होते हैं।

पहले प्रकार के कौलाचारी को प्राकृत कौल कहा जाता है। दूसरे प्रकार के कौलाचारी कौल कहलाते हैं तथा तीसरे प्रकार के कौलाचारियों को उत्तम कौल कहा जाता है।


Page last modified on Wednesday April 16, 2014 11:06:52 GMT-0000