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चौपाई


चौपाई हिन्दी का सर्वाधिक लोकप्रिय अपना छन्द है। यह रचना मात्रिक सम छन्द का एक भेद है। यह सोलह मात्राओं का वर्णनात्मक छन्द है तथा प्राकृत और अपभ्रंश से यह निकली है। कहीं-कहीं पंद्रह मात्राएं भी मिलती हैं परन्तु अन्त में ग तथा ल आ जाने पर वह चौपई हो जात है तथा अन्य स्थितियों में उसे चौपाई ही माना जाता है। चौपाई सामान्यतः वर्णनात्मक होती है।

हिन्दी में यह छन्द चन्द्र के काव्य से प्रयुक्त होना शुरु हुआ था।

Page last modified on Friday November 4, 2016 08:16:45 GMT-0000