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छल

किसी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को छोखे में रखकर उसे हानि पहुंचाना छल कहलाता है। वास्तव में यह सुनियोजित होता है तथा यह संचारी नहीं है।

परन्तु साहित्य में छल एक नया संचारी भाव है तथा अवमान, विपरीत पक्ष, एवं कुत्सिस चेष्टा इसके विभाव हैं। इसके अनुभाव हैं वक्रोक्ति, निरन्तर स्मित तथा चुपके-चुपके देखना एवं अपने विकारों को छिपाना।

Page last modified on Wednesday February 22, 2017 05:05:11 GMT-0000