वामाचार
भारतीय तंत्रों में वामाचार एक प्रमुख आचार है। वामा का अर्थ स्त्री होता है तथा इस तंत्र साधना में स्त्री के साथ चलने वाली साधनाएं होती हैं इसलिए इसे वामाचार कहा जाता है। यह निवृत्तिमार्गी साधना है। यह प्रवृत्तिमार्गी दक्षिणाचार की उल्टी परिपंथी साधना है इसलिए इस अर्थ में भी वामाचार नाम सार्थक है। इसके अलावा कई अन्य विद्वान इसा आचार की आराध्या देवी पार्वती जो शिव के वामांक में विराजती हैं, इसलिए इसका नाम वामाचार बताते हैं।इसमें साधकों को दिन में ब्रह्मचारी की तरह रहकर रात में पंच मकारों से पूजा करनी होती है।
कहा जाता है कि इस प्रकार के साधक की सिद्धि इन्हें गुप्त न रखने से नष्ट हो जाती है। इसलिए इन साधनाओं को गुप्त ही रखा जाता है।