वित्तमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने आर्थिक सुधार कार्यक्रमों की शुरुआत की थी। पिछले 24 जुलाई को उसकी शुरुआत के 20 साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान अनेक सुधार कार्यक्रम अपनाए गए। देश दुनिया की नजर अब उसके आगे अपनाए जाने वाले कार्यक्रमों पर लगी हुई है।
प्रधानमंत्री मानसून सत्र के दौरान अगले दौर के सुधार कार्यक्रमों पर मजबूती के साथ बढ़ते दिखाई देंगे। ऐसा करके वह देश के सामने यह साबित करना चाहेंगे कि भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के बीच देश की राजनीति पर उनकी पकड़ बनी हुई है ओर उनकी सरकार कहीं से कमजोर नहीं हुई है। वह यह भी दिखाना चाहेंगे कि पार्टी और सरकार दोनों महत्वपूर्ण मसलों पर एक तरह से सोचती हैं।
मिल रहे संकेत के अनुसार प्रधानमंत्री का कार्यालय इन दिनों संसद में पेश किए जाने वाले विधेयकों की तैयारी में गंभीरता से लगा हुआ है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की का्रंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के हमलों का प्रभावी सामना करने के लिए विस्तार से बातचीत हो चुकी है। इस बार वे संसद का सामना कांग्रेस नेतृत्व के पूर्ण समर्थन के साथ करने जा रहे हैं।
सरकार ने सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के साथ मिल कर आर्थिक नीतियों से संबंधित कानूनों का एक पैकेज तैयार किया है, जो एक साथ ही गरीब लोगों और अर्थपव्यवस्था के विकास की जरूरतों का घ्यान में रखता है।
राजनैतिक मोर्चे पर सरकार लोकपाल विधेयक को संसद में पेश करने जा रही है। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद को कहा गया है कि इस विधेयक के मसौदे पर विपक्षी दलों के साथ सही तरीके से विचार विमर्श सुनिश्चित किया जाय। इसी सत्र के दौरान इस विधेयक को पारित कराने की कोशिश की जाएगी। सिविल सोसाइटी का ग्रुप इस मसले पर अलग थलग पड़ गया है, क्योंकि कोई भी पार्टी अन्ना हजारे द्वारा विधेयक पारित किए जाने के 16 अगस्त की सीमा रेखा को स्वीकार नहीं कर रही है।
जहां तक लोगों के लिए कार्यक्रमों की बात है, तो प्रधानमंत्री ने खाद्य सुऱक्षा विधेयक को हरी झंडी दे दी है। यह विधेयक सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के दिमाग की उपज है, जिसमें सरकार ने अपनी तरफ से कुछ फेरबदल भी किए हैं। खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाला यह कार्यक्रम बेहद महत्वाकांक्षी है, हालोंकि इसके वित्तीय रूप से सक्षम होने को लेकर कुछ नौकरशाहों में संशय भी है।
प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश को भूमि अधिग्रहण से संबंधित नए कानून के लिए विधेंयक बनाने का काम दे रखा है। सरकार की पूरी मंशा इसी सत्र के दौरान इस विधेयक को दोनों सदनो ंसे पारित कराने की है और इसके लिए सभी पार्टियों से सलाह मशविरा भी की जा रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री कुमारी मायावती को विश्वास में लेने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना है।
खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण से संबंधित कानून आम लोगों के हितों के साथ सीधे रूप से जुड़े हुए हैं। इनके द्वारा सरकारी दल अपने जनाधार को पुख्ता करने की कोशिश कर रहे हैं, तो आर्थिक सुधार कार्यक्रमों द्वारा देश को नई दिशा देने का काम भी इस सत्र के दौरान करने के लिए सरकार कमर कस रही है। इसके तहत सरकार पेशन फंड बिल पेश करेगी और खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश को संभव बनाने वाला बिल भी संसद में लाएगी। पेशन बिल को पास करने के लिए सरकार ने भाजपा के साथ पहले ही बात कर ली है। भाजपा को कुछ मसलों पर एतराज है और उनकी चिंताओं के निराकरण की भी कोशिश की जा रही है।
आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार बीमा से संबंधित विधेयक भी इस सत्र के दौरान पारित कराने की कोशिश करेगी। यह विधेयक संसद में पेश किया जा चुका है और यह वित्त मंत्रालय की स्थाई समिति के पास है। इसके मुख्य प्रावधानों में विदेशी निवेश की सीमा वर्तमान 26 फीसदी से बढ़कर 49 फीसदी करने की है। भाजपा को सरकार मनाने की कोशिश कर रही है कि इसे इसी सत्र में पारित करने में वह सरकार का सहयोग करे।
इन कानूनी प्रावधानों का देश की राजनीति से गहरा संबंध हैं और सरकार का नेत्त्व कर रही कांग्रेस इस बात को भलीभांति समझती है। अगले साल 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और उनमें भी उत्तर प्रदेश कांग्रेस के लिए खास मायने रखते हैं। वहां राहुल गांधी की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई है और उसके नतीजे पर राहुल गांधी की अगली राजनीति का स्वरूप उभ्रर कर सामने आएगा। जाहिर है आने वाले दिन प्रधानतंत्री मनमोहन सिंह ही नहीं, बल्कि उनकी कांग्रेस के लिए भी काफी मायने रखेंगे। (संवाद)
दूसरे दौर के सुधार के लिए दृढ़ हैं प्रधानमंत्री
अपने आपको साबित करना चाहेंगे मनमोहन सिंह
नित्य चक्रबर्त्ती - 2011-07-28 11:36
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह दूसरे दौर के सुधार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ दिखाई पड़ रहे हैं। अगले मानसून सत्र में वे अनेक ऐसे कानून बनाने की कोशिश करते दिखाई देंगे, जो न केवल राजनैतिक रूप से, बल्कि आर्थिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण होंगे।