जब उस समय मुख्यमंत्री भाजपा के भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे थे, तो नैतिकता के स्तर पर वे ऊंचे नहीं दिखाई पड़ रहे थे। उसका कारण यह था कि खुद मुख्यमंत्री के खिलाफ एक भ्रष्टाचार का मामला चल रहा था। उस मामले को राज्य में डंपर घोटाला कहा जा रहा था, जिसकी कहानी के केन्द्र में मुख्यमंत्री की पत्नी साधना सिंह थी। कहानी के अनुसार साधना सिंह के एक डंपर को जे पी उद्योग वालों ने किराए पर ले रखा था। उस डंपर की खरीद भी जेपी उद्योग वालों के पैसे से ही हुई थी। मुख्यमंत्री पर आरोप लगा कि वे एक उद्योगपति से अपनी पत्नी के नाम पर वित्तीय फायदा उठा रहे थे।

रमेश साहू ने अपनी एक शिकायत में लोकायुक्त से यह माग की थी कि जेपी एसोसिएट्स से संबंधित उस डंपर घोटाले की जांच की जाए और मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाया जाए। वही मामला अदालत के अधीन था। शिकायत में कहा गया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने नाम के साथ अपना सही पता नहीं लिखा था और उन्हें अपने पति का नाम शिवराज सिंह चौहान की जगह एस एस चौहान लिखा था।

अपने फैसले में भोपाल के अतिरिक्त जिला जज ने शिकायत को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश मंे कहा कि साधना सिंह के लिए डंपर की खरीद में मुख्यमंत्री द्वारा बेची गई अपनी जमीन की राशि का इस्तेमाल किया गया था। इसलिए यह कहना गलत है कि जेपी ने उस डंपर की खरीद करवाई थी। अदालत ने यह भी कहा कि साधना सिंह ने अपना स्थानीय आवास अपने नाम के साथ लिखा और उसमें गलत कुछ भी नहीं था। फैसले में यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री के पद पर बैठा कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को कुछ हजार रुपए का लाभ पहुंचाने के लिए घोटाला नहीं करेगा। अन्य मुद्दों को भी तकनीकी बताते हुए अदालत ने खारिज कर दिया।

उस फैसले के बाद मुख्यमंत्री चौहान का रास्ता साफ हो गया है। पार्टी के अंदर के उनके विरोधी उस फैसले का इंतजार कर रहे थे और उन्हें लग रहा था कि अदालत का विपरीत फैसला आने के बाद उनकी भी वही गति होगी, जो कर्नाटक में येदुरप्पा की हुई। पर फैसला आने के बाद भाजपा के ऐसे नेताओं को निराशा हाथ लगी है।

कथित डंपर घोटाला मुख्यमंत्री चौहान के चरित्र पर लगाया जा रहा एकमात्र दाग था। उसके अलावा उन पर अन्य किसी तरह का आरोप नहीं लगा है। अब उस दाग से मुक्त होने के बाद मुख्यमंत्री भाजपा के भ्रष्ट नेताओं और कार्यकर्त्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की नैतिक शक्ति प्राप्त कर चुके हैं।

दूसरी तरफ जिला अदालत के फैसले पर प्रतिक्रया व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेताओं ने उस पर असंतोष जताया और घोषणा की है कि वे उस फेसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। (संवाद)