श्री सैयाम कोई अपवाद नहीं हैं। सच तो यह है कि टिकट बंटवारे के बाद पार्टी में विद्रोह की स्थिति पैदा हो गई है। लगभग 2 दर्जन विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां टिकट वितरण को लेकर लोगों में भारी रोष है। असंतुष्ट भारी संख्या में भोपाल मुख्यालय पहुंच रहे हैं और यहां आकर वे अपना अपना असंतोष व्यक्त कर रहे हैं।

दो तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं। एक प्रदर्शन तो टिकट से वंचित लोगों का है। जिनके टिकट कट गए हैं, उनके समर्थक अपना असंतोष व्यक्त करते हुए मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं। और दूसरे प्रकार का प्रदर्शन निवर्तमान विधायकों के खिलाफ हो रहा है, जिनको टिकट दिए जाने के विरोध में नारे लग रहे हैं।

कुछ असंतोष तो कंाग्रेस के अंदर भी दिख रहे हैं, लेकिन वे असंतोष सत्तारूढ़ पार्टी की तरह तीखे नहीं हैं। कांग्रेस में टिकट का बंटवारा दिल्ली के लोग करते हैं। हालांकि कांग्रेस के नेताओं में टिकट बंटवारे को लेकर उभर रहे मतभेद की खबरें भोपाल पहुंच रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता कांतिलाल भूरिया द्वारा दिल्ली की एक बैठक के बहिष्कार से संबंधित है। कहा जा रहा है कि टिकट वितरण पर असंतोष व्यक्त करते हुए श्री भूरिया ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। बाद में उन्होंने अपने बहिष्कार की खबर को निराधार बताया।

25 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए दोनों पार्टियों ने अपनी अपनी पहली सूची का एलान कर दिया है। भाजपा की पहली सूची का एलान 31 अक्टूबर को हुआ। उस सूची में 147 उम्मीदवारों के नाम थे। मध्यप्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं। इस सूची में कुछ आश्चर्यजनक बातें देखने को भी मिलीं। पार्टी ने विधानसभा चुनाव में तीन सांसदों को भी खड़ा करने का फैसला किया है। 22 निवर्तमान विधायक जिनमें दो मंत्री भी शामिल हैं, टिकट पाने में विफल रहे हैं। दो अन्य मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों को बदल भी दिया गया है। सैयाम के अलावा राम दलाल अहीरवार भी एक ऐसे मंत्री हैं, जिनका टिकट काट दिया गया है। 7 अन्य मंत्रियों के भाग्य का फैसला होना अभी बाकी है। उनके बारे में तभी पता चलेगा, जब दूसरी सूची जारी की जाएगी।

सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि तीन सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़ाया जा रहा है। उनमे यशोधरा राजे सिंधिया भी एक हैं। वे ज्योतिरादित्या सिंधिया की बुआ हैं। दो अन्य सांसद जिन्हें विधानसभा का टिकट दिया गया हैं- भूपेन्द्र सिंह और के डी देशमुख। ये सांसद इसलिए चुनाव लड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि उनकी जीत सुनिश्चित है और सरकार बनने के बाद उन्हें मंत्री बनाया जाना भी निश्चित है।

उम्मीदवारों की सूची में बाबू लाल गौर भी शामिल हैं। श्री गौर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। फिलहाल वे चैहान मंत्रिमंडल के सदस्य है। उनकी आयु 84 साल की है और वे लगातार 10वीं बार चुनाव लड़ रहे हैं। वे पहली बार 1973 में गैर कांग्रेसी गैर कम्युनिस्ट विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में 1973 में पहलंी बार चुनाव मैदान में उतरे थे। उस चुनाव में उन्होंने विजय प्राप्त की थी। उसके बाद वे लगातार चुनाव लड़ते और जीतते रहे हैं। विधायिका में लगातार 40 साल तक बने रहने का रिकार्ड उनके नाम दर्ज है।

आरिफ बेग को भाजपा के उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया जाना भी एक प्रकार का आश्चर्य ही है। यह दूसरी बार है, जब भारतीय जनता पार्टी किसी मुस्लिम को विधानसभा का टिकट दे रही है। आरिफ बेग ने अपनी राजनीति की शुरुआत एक समाजवादी नेता के रूप में की थी। 1977 के चुनाव में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा को पराजित किया था। उसके पहले वे गैर कांग्रेसी संविद सरकार में मंत्री भी रहे थे।

आरिफ बेग को भोपाल की एक सीट से खड़ा किया जा रहा है। जिस सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाया जा रहा है उसका प्रतिनिधित्व फिलहाल आरिफ अकील कर रहे हैं, जो कांग्रेस के टिकट से इस क्षेत्र से जीते थे। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश विधानसभा में श्री अकील अकेले मुस्लिम विधायक हैं। भाजपा के जो स्थानीय नेता इस क्षेत्र से चुनाव लड़ने का सपना संजो रहे थे, वे श्री बेग की उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं और पार्टी पर मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति का आरोप लगा रहे हैं। (संवाद)