अखिलेश प्रताप सिंह राहुल गांधी से नजदीकी से जुड़े हुए हैं। अमेठी और रायबरेली में जब से अपनी राजनैतिक सक्रियता बढ़ाई है, उसी समय से श्री सिंह उनके साथ इस इलाके मे दौरे पर देखे जा सकते हैं। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में पहले भी राहुल फैक्टर का लाभ कांग्रेस उठा चुकी है।

वे याद दिलाते हैं कि 2009 के लोकसभा चुनाव में राहुल के कारण ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सीट बढ़कर 22 हो गई थी। उसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मत प्रतिशत में 4 फीसदी का इजाफा भी राहुल के कारण ही हुआ था।

कांग्रेस के नेता ने दावा किया कि युवा कांग्रेस के पक्ष में ही मतदान करेंगे, क्योंकि राहुल गांधी ने राजनीति का एजेंडा तय कर दिया है। वह एजेंडा राजनीति को अपराध और भ्रष्टाचार से मुक्त करने का है। उनका मानना है कि राहुल गांधी इस बार यह सुनिश्चित कराएंगे कि पार्टी का टिकट स्वच्छ छवि के लोगों को ही मिले।

अखिलेश प्रताप का दावा है कि देश के युवाओं ने यह महसूस किया है कि जहां नरेन्द्र मोदी सिर्फ सांप्रदायिकता की बात करते हैं, वहीं राहुल गांधी सर्वांगीन विकास और राजनीति की बात करते हैं। अखिलेश ने कहा कि रोजगार विकास के द्वारा पैदा होगा, न कि सांप्रदायिकता की नीति के द्वारा।

उत्तर प्रदेश के राजनैतिक परिदृश्य की चर्चा करते हुए अखिलेश प्रताप ने कहा कि यहां के लोग समाजवादी पार्टी और बहुजन पार्टी की जातिवाद की राजनीति और भ्रष्टाचार से ऊब चुके हैं। वे भारतीय जनता पार्टी की सांप्रदायिकता की राजनीति से भी ऊब चुके हैं। इसके कारण अब वे राहुल गांधी की ओर देख रहे हैं।

लेकिन वरिष्ठ राजनैतिक विश्लेषक रिहान अहमद का कहना है कि राहुल गांधी का असर बहुत ही मामूली होगा, क्योंकि वे अभी भी अपने आपको आम आदमी के साथ जोड़ नहीं पाए हैं। उसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी का राजस्थान में दिया गया भाषण बहुत ही भावनात्मक और मजबूत था।

रिहान ने कहा कि मतदाता कांग्रेस पर तभी भरोसा कर सकते हैं, जब उन्हें लगेगा कि वे जिस बदलाव की बात आज कर रहे हैं, उस बदलाव को हकीकत में तब्दील करने की क्षमता भी रखते हैं।

मुस्लिम वोटरों की चर्चा करते हुए रिहान ने कहा कि वे कांग्रेस का ही समर्थन करंेगे, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस ही भारतीय जनता पार्टी का सामना करती रही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को मिल रहे मुस्लिम समर्थन में कमी आती जा रही है। इसका कारण अखिलेश सरकार के गठन के बाद हो रहे सांप्रदायिक दंगे हैं।

लेकिन अनेक लोग ऐसे भी हैं, जो राहुल फैक्टर के उत्तर प्रदेश में प्रभावी होने की बात को शंका की दृष्टि से देखते हैं।

ऐसे लोग अभी भी याद करते हैं कि राहुल गांधी ने खुद कांग्रेस की जीत की उम्मीद पर उस समय पानी फेर दिया था, जब उन्होंने एक चुनावी सभा के दौरान 2012 में समाजवादी पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र फाड़कर फेक दिया था।

अमेठी का दौरा करने के बाद इस संवाददाता ने पाया कि अपने लोकसभा क्षेत्र में ही राहुल की स्थिति अच्छी नहीं है। इससे ज्यादा परेशान करने वाली बात उनके लिए नहीं हो सकती।

जब कभी अपने क्षेत्र अमेठी में राहुल का दौरा होता है, उन्हें लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है। लोग उनसे चुनाव में किए गए वायदों को पूरा करने की मांग करते हैं और क्षेत्र के पिछड़ेपन का भी रोना रोते हैं।

अमेठी के मतदाताओं की शिकायत है कि विधानसभा चुनाव में भारी हार का सामना करने के बाद भी अमेठी के राजनैतिक प्रबंधकों के रवैये में कोई बदलाव नहीं हुआ है। गौर तलब है कि अमेठी लोकसभा क्षेत्र के 5 में से 3 में कांग्रेस की हार हो गई थी। रायबरेली की तो पांचों सीटों पर कांग्रेस हार गई थी। जिन इलाकों में कांग्रेस की जीत हुई भी, तो जीत का अंतर बहुत ही कम था।

शिकायत यह है कि वहां के लोग राहुल गांधी से मिल नहीं पाते और उनके प्रबंधक लोगों की सही शिकायतांे को भी दूर करने के लिए उनसे पैसे लेते हैं।

हालांकि समाजवादी पार्टी ने घोषणा की है कि रायबरेली में सोनिया गांधी के खिलाफ वह अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगी, लेकिन अमेठी के बारे में उसने अब तक इस तरह की घोषणा नहीं की है। कांग्रेस ने भी बदले में मुलायम, अखिलेश और डिंपल के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया।

प्रदेश के कांग्रेस नेताओं की चिंता इस बात को लेकर भी है कि नरेन्द्र मोदी की सभाओं की तुलना में राहुल गांधी की सभाओं में बहुत कम लोग आ रहे हैं।

कांग्रेस जनों को लग रहा है कि प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश के सभी लोकसभा क्षेत्रों में सभाएं करनी चाहिए और उन्हें अपने आपको रायबरेली व अमेठी तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए। (संवाद)